Manila, (Philippines): फिलीपींस की राजनीति में एक ऐतिहासिक और तनावपूर्ण मोड़ आ गया है। देश के निचले सदन (संसद) ने भारी बहुमत के साथ उपराष्ट्रपति सारा डुटरटे के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) प्रस्ताव पारित कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया जब संसद के बाहर प्रदर्शनकारी कार्रवाई के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे और भीतर राजनीतिक टकराव चरम पर था।

क्या हैं आरोप? उपराष्ट्रपति सारा डुटरटे के खिलाफ महाभियोग का आधार काफी गंभीर है। उन पर निम्नलिखित आरोप लगाए गए हैं:

  • सरकारी धन का दुरुपयोग: सार्वजनिक फंड के इस्तेमाल में अनियमितता।

  • भ्रष्टाचार: पद पर रहते हुए अकूत संपत्ति अर्जित करने का संदेह।

  • गंभीर धमकी: राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी देना।

सड़कों पर जन-आक्रोश

संसद में वोटिंग से ठीक पहले मनीला की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों का हुजूम उमड़ पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने सांसदों से मांग की कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जवाबदेही तय की जाए। जहां एक गुट इसे लोकतंत्र की जीत बता रहा है, वहीं डुटरटे समर्थकों का कहना है कि यह केवल राजनीतिक प्रतिशोध (Political Vendetta) है। तनाव को देखते हुए संसद परिसर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

संवैधानिक प्रक्रिया: अब क्या होगा?— निचले सदन से प्रस्ताव पारित होने के बाद अब यह मामला सीनेट में जाएगा।

  1. सुनवाई: सीनेट एक अदालत की तरह काम करेगा जहां महाभियोग की सुनवाई होगी।

  2. अंतिम फैसला: यदि सीनेट में भी सारा डुटरटे दोषी पाई जाती हैं, तो उन्हें तुरंत पद से हटा दिया जाएगा।

  3. आजीवन प्रतिबंध: पद से हटने के साथ ही उन पर भविष्य में किसी भी सार्वजनिक पद को संभालने पर आजीवन प्रतिबंध लग सकता है।

2028 के चुनाव पर नजर

यह घटनाक्रम फिलीपींस के दो सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों—मार्कोस और डुटरटे—के बीच बढ़ती खाई को दर्शाता है। कभी सहयोगी रहे ये दोनों परिवार अब आमने-सामने हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस महाभियोग का सीधा असर 2028 के राष्ट्रपति चुनावों पर पड़ेगा। संसद के बाहर दिखा जन-आक्रोश इसी बढ़ते विभाजन और राजनीतिक अनिश्चितता की एक छोटी सी झलक मात्र है।

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