India News: मध्य प्रदेश का पन्ना क्षेत्र, जिसे दुनिया भर में अपनी जगमगाती हीरों की खदानों के लिए जाना जाता है, उसकी चमक के पीछे एक गहरा और दर्दनाक सच छिपा है। यहाँ की सिलिका डस्ट (Silica Dust) स्थानीय लोगों, खासकर खदानों में काम करने वाले पुरुषों को एक लाइलाज बीमारी सिलिकोसिस का शिकार बना रही है, जो पूरे समुदाय पर एक ‘कालिख’ की तरह है।
पन्ना का स्याह सच: हीरे नहीं, मौत बांट रही है सिलिका डस्ट, विधवाओं से भरा गांव
यहां की हर कहानी दर्द भरी है। 35 साल के थे जब एक पुरुष अचानक खत्म हो गए। डॉक्टर ने मौत का कारण बताते हुए कहा, “फेफड़ों में धूल भर गई थी।” उनके जाने के बाद तीन बच्चों का पालन-पोषण उनकी पत्नी ने अकेले किया। यह सिर्फ एक कहानी नहीं है।
35 से 45 साल तक ही पहुंच पाते हैं पुरुष, 70 से अधिक महिलाएं विधवा
यही वह भयावह सच्चाई है कि पन्ना की स्टोन खदानों में काम करने वाले पुरुष शायद ही कभी 45 साल की उम्र पार कर पाते हैं। सिलिका डस्ट सांस के ज़रिए फेफड़ों तक पहुंचकर जम जाती है, जिससे फेफड़े पत्थर की तरह सख्त हो जाते हैं। मरीज़ ठीक से सांस नहीं ले पाता, और अंततः तेज़ बुखार और मुँह से खून आने के बाद उसकी मौत हो जाती है। यह एक लाइलाज बीमारी है, जिसका महंगा इलाज केवल कुछ समय के लिए जीवन को ‘मैनेज’ कर सकता है।
आदिवासी मोहल्ले का यह समुदाय ही इस बीमारी की सबसे बड़ी गाज झेल रहा है। इस गांव में अकेले 70 विधवाएं हैं। एक महिला ने अपनी शादी की कहानी बताते हुए कहा कि मायके जाने पर उन्हें बताया गया था कि इस गांव में औरतें जल्दी विधवा हो जाती हैं। उनकी बेटी होने पर डॉक्टर ने भी उसे बीमारी से दूर रखने की सलाह दी थी।
स्थिति यह है कि गांव में 60 साल के दो-चार पुरुष ही मुश्किल से मौजूद हैं। मजबूरी में, कम उम्र की महिलाएं रोज़गार के लिए दिल्ली या किसी और बड़े शहर की ओर पलायन कर रही हैं, अपने बाल-बच्चों को साथ लिए। इस हीरो के शहर में जीवन का सबसे बड़ा सच यही है कि ‘फेफड़े पत्थर हुए, फिर देह मिट्टी’ हो जाती है।



