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Panipat: क्या आपने कभी सोचा है कि मोबाइल का नेटवर्क न मिलना किसी बड़े कानूनी पचड़े की वजह बन सकता है? हरियाणा के पानीपत जिला न्यायालय परिसर में कुछ ऐसा ही हुआ है। रिलायंस जियो के खराब नेटवर्क से परेशान होकर वकीलों ने अब सीधा मोर्चा खोल दिया है। मामला इतना बढ़ गया है कि लोक अदालत में याचिका दायर कर रिलायंस जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी और मैनेजिंग डायरेक्टर ईशा अंबानी को भी इस मामले में पक्षकार बनाया गया है।
नेटवर्क के लिए सड़क पर आने को मजबूर वकील
अधिवक्ताओं का आरोप है कि कोर्ट परिसर के भीतर जियो का नेटवर्क या तो बेहद कमजोर रहता है या पूरी तरह गायब हो जाता है। वकीलों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि जरूरी कॉल करने या मुवक्किलों से बात करने के लिए उन्हें कोर्ट रूम छोड़कर बाहर खुले मैदान या सड़क तक दौड़ लगानी पड़ती है। आज के डिजिटल युग में, जहाँ केस की तारीखों से लेकर दस्तावेजों तक का काम मोबाइल पर निर्भर है, वहां सिग्नल की यह आंख-मिचौली वकीलों के पेशेवर काम में हां और ना की बड़ी बाधा बन गई है।
न्यायिक कार्यों पर पड़ रहा है असर
याचिका में साफ कहा गया है कि नेटवर्क न होने की वजह से कई बार जरूरी संदेश समय पर नहीं मिल पाते, जिससे केस की तैयारी और अदालती कार्यवाही प्रभावित होती है। वकीलों का तर्क है कि संचार की इस कमी से न केवल उनका समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की गति भी धीमी पड़ रही है।
20 फरवरी को होगी बड़ी सुनवाई
लोक अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका स्वीकार कर ली है और जियो प्रबंधन को समन जारी कर दिए हैं। कोर्ट ने कंपनी से जवाब मांगा है कि आखिर परिसर में यह समस्या क्यों बनी हुई है और इसे कब तक ठीक किया जाएगा। अब पूरे हरियाणा की नजरें 20 फरवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ अंबानी परिवार के प्रतिनिधियों को इस नेटवर्क संकट पर अपनी सफाई देनी होगी।

