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Ranchi : झारखंड में आदिवासी दर्जे को लेकर जारी विवाद एक बार फिर उभर आया है। शनिवार को मोरहाबादी मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक “आदिवासी बचाओ मोर्चा” और विभिन्न संगठनों ने विशाल विरोध मार्च निकाला। इस मौके पर मुख्य पहान जगलाल पहान ने कहा कि आदिवासी बनने के लिए आदिवासी परिवार में जन्म लेना अनिवार्य है, आंदोलन या राजनीतिक दबाव से किसी को आदिवासी नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज की अपनी परंपराएं हैं, जहां जन्म से लेकर मृत्यु तक सभी संस्कार पहान द्वारा कराए जाते हैं, जबकि कुर्मी-कुड़मी समाज इन अनुष्ठानों के लिए ब्राह्मण-पंडितों को बुलाता है।
कार्यक्रम में केन्द्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि कुर्मी-कुड़मी समाज केवल आरक्षण और राजनीतिक लाभ लेने के लिए आदिवासी दर्जा पाना चाहता है। उन्होंने सवाल उठाया कि “रेल टेका” और “डहर छेका” जैसे मुद्दों पर सरकार क्यों चुप है। बबलू मुंडा ने चेतावनी दी कि यदि आदिवासी पहचान के साथ छेड़छाड़ हुई तो बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव, वीर बुधु भगत और तेलंगा खड़िया जैसे शहीदों की परंपरा में बड़ा उलगुलान होगा।
सभा का संचालन महादेव टोप्पो, महासचिव, केन्द्रीय सरना समिति ने किया। मौके पर शिवधन मुंडा, राजेश पहान, अंजन मुंडा, मनीष उरांव सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर कुर्मी-कुड़मी को आदिवासी सूची में शामिल करने के प्रयास का विरोध किया।

