रांची: सरकारी जमीनों और निगम की संपत्तियों पर अवैध कब्जा जमाए बैठे लोगों की अब खैर नहीं है। रांची नगर निगम अपनी खोई हुई जमीनों और परिसंपत्तियों को वापस पाने के लिए एक बड़े अभियान की शुरुआत करने जा रहा है। रविवार को नगर प्रशासक की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय ऑनलाइन बैठक में इस संबंध में “अल्टीमेटम” जारी कर दिया गया है।

लापरवाही का फायदा और अब ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

बैठक के दौरान यह कड़वा सच सामने आया कि बीते वर्षों में सेवानिवृत्त हो चुके कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की ढुलमुल कार्यशैली के कारण निगम की कई कीमती संपत्तियों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) नहीं हो सका। इसका फायदा उठाकर भू-माफियाओं और रसूखदारों ने निगम की संपत्तियों को या तो अपने निजी कब्जे में ले लिया या उन पर अवैध निर्माण कर अतिक्रमण कर लिया।

वर्तमान में इन संपत्तियों को वापस लेने में निगम को भारी कानूनी और प्रशासनिक पेचीदगियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे न केवल सरकारी राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि विकास योजनाओं के लिए जमीन की कमी भी महसूस की जा रही है।

30 मार्च की डेडलाइन : मिशन मोड में निगम

नगर प्रशासक ने सख्त लहजे में अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अब बहानेबाजी नहीं चलेगी। उन्होंने दो टूक कहा:

  • अद्यतन सूची: सभी वार्डों और क्षेत्रों में निगम की ऐसी संपत्तियों की लिस्ट तुरंत तैयार की जाए जो वर्तमान में अतिक्रमण की चपेट में हैं।

  • अंतिम समय सीमा: आगामी 30 मार्च 2026 तक सभी चिन्हित परिसंपत्तियों को हर हाल में निगम के कब्जे में लेने की प्रक्रिया पूरी की जाए।

  • पुनर्विकास योजना: कब्जा मुक्त कराई गई जमीनों को सार्वजनिक पार्क, पार्किंग या सामुदायिक केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

जनहित सर्वोपरि : यह जनता की संपत्ति है

प्रशासक महोदय ने स्पष्ट किया कि नगर निगम की संपत्तियां किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि सार्वजनिक संसाधन हैं। इनका संरक्षण करना निगम प्रशासन की प्राथमिकता है ताकि इन जमीनों का उपयोग शहर के सौंदर्यीकरण और जनहित से जुड़ी सुविधाओं के लिए किया जा सके। इस आदेश के बाद अब अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि प्रशासन इस बार किसी भी दबाव में झुकने के मूड में नहीं दिख रहा है।

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