गुमला/चैनपुर: जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के निर्देश पर चैनपुर, डुमरी और जारी प्रखंड क्षेत्रों में सामाजिक कुरीतियों को मिटाने और ग्रामीणों को कानूनी जागरूकता प्रदान करने के उद्देश्य से व्यापक अभियान चलाया गया। इसी क्रम में डुमरी प्रखंड के खेतली पंचायत भवन में एक विशेष जागरूकता शिविर आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं, पुरुष और युवा शामिल हुए।
शिविर में वक्ताओं ने नशा मुक्ति, बाल विवाह, डायन-बिसाही और सामाजिक शोषण जैसी कुरीतियों पर खुलकर चर्चा की। विशेषज्ञों ने कहा कि बाल विवाह न केवल एक दंडनीय अपराध है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर गंभीर प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि नशा घरेलू हिंसा, आर्थिक संकट और सामाजिक पतन की जड़ है, इसलिए इससे दूर रहना और दूसरों को भी जागरूक करना जरूरी है।
ग्रामीणों को उनके मौलिक अधिकारों, सरकारी योजनाओं, निःशुल्क विधिक सहायता एवं शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई। मौके पर विष्णु रौतिया ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार का लक्ष्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और सुरक्षा पहुंचाना है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि यदि किसी भी प्रकार का बाल विवाह, नशा संबंधित समस्या या महिलाओं के खिलाफ अत्याचार दिखे तो तुरंत प्रशासन या DLSA को सूचना दें।
इस कार्यक्रम में परा-विधिक स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को जोड़ने और उन्हें कार्यक्रम स्थल तक लाने का काम किया। शिविर में मुख्य रूप से बिष्णु रौतिया, भूक्साई खेरवार, मधुवती देवी, आरिफ अंसारी, दीपक कुमार सहित कई प्रबुद्ध नागरिक और ग्रामीण मौजूद रहे।
यह जागरूकता अभियान चैनपुर–गुमला क्षेत्र में सामाजिक सुधार और न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आया है।



