Patna News: पटना स्थित ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल कुम्हरार पार्क का शुक्रवार को सीएम नीतीश कुमार ने निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मगध साम्राज्य काल से जुड़े संरक्षित स्तम्भों, अवशेषों और उत्खनन स्थलों का अवलोकन किया। सीएम ने बुलंदीबाग और कुम्हरार उत्खनन से जुड़ी जानकारियों के लिए लगाए गए सूचना बोर्डों को भी ध्यानपूर्वक देखा।

निरीक्षण के दौरान सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कुम्हरार पार्क के बेहतर विकास, संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा जाए। उन्होंने कहा कि कुम्हरार पार्क का सीधा संबंध मगध साम्राज्य और मौर्यकालीन इतिहास से है, इसलिए इसका संरक्षण बेहद जरूरी है।

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सीएम ने कहा कि कुम्हरार पार्क का क्षेत्र काफी विस्तृत है और यहां बड़ी संख्या में पर्यटक, इतिहास प्रेमी और छात्र भ्रमण के लिए आते हैं। ऐसे में पार्क परिसर, प्रदर्शों और पुरावशेषों का सुनियोजित रखरखाव आवश्यक है, ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान बनी रहे।

उन्होंने यह भी कहा कि देश-विदेश से इतिहास के विद्यार्थी और शोधकर्ता इस स्थल से जुड़े तथ्यों को समझने यहां आते हैं। इसे देखते हुए पार्क का सौंदर्यीकरण और संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए जरूरी है।

मौर्यकालीन सभागार का ऐतिहासिक महत्व

वर्ष 1912–15 और 1951–55 के दौरान हुई खुदाई में कुम्हरार में 80 स्तम्भों वाला विशाल मौर्यकालीन सभागार सामने आया था। इस सभागार में स्तम्भों की 10 पंक्तियां पूरब-पश्चिम और 8 पंक्तियां उत्तर-दक्षिण दिशा में थीं। स्तम्भों के बीच करीब 15 फीट की दूरी थी और सभागार दक्षिणाभिमुख था।

बाद के वर्षों में आसपास विकास कार्यों और भू-जल स्तर बढ़ने के कारण यह पुरास्थल जलमग्न होने लगा। विशेषज्ञ समिति की अनुशंसा पर वर्ष 2005 में इसे मिट्टी और बालू से ढककर सुरक्षित किया गया।

पाटलिपुत्र का गौरवशाली अतीत

प्राचीन काल में पटना को पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था। यूनानी राजदूत मेगास्थनीज ने अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में इस नगर का विस्तार से वर्णन किया है। वहीं चीनी यात्री फाह्यान और ह्वेनसांग ने भी इसे समृद्ध और ऐतिहासिक केंद्र बताया है।

सीएम ने स्पष्ट किया कि कुम्हरार जैसे ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण और विकास राज्य सरकार की प्राथमिकता है, ताकि बिहार के गौरवशाली इतिहास को संरक्षित रखा जा सके।

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