Jharkhand News: झारखंड आंदोलन के जननायक, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा आज उनके पैतृक गांव नेमरा में संपन्न हो रही है। मंगलवार को जैसे ही उनका पार्थिव शरीर नेमरा पहुंचा, वैसे ही लोगों की भारी भीड़ अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। अंतिम विदाई के इस भावुक क्षण में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी कल्पना सोरेन, भाई बसंत सोरेन और पूरे झारखंड के नेता-जनता भावविह्वल होकर मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं अपने पिता के पार्थिव शरीर के साथ रांची से नेमरा तक की यात्रा में साथ रहे। शव वाहन जैसे ही नेमरा पहुंचा, पारंपरिक विधियों के साथ अंतिम दर्शन की प्रक्रिया शुरू हुई। लोगों ने “वीर शिबू अमर रहें” के नारों के साथ अपने प्रिय नेता को अंतिम सलामी दी।

धान के खेत से बना श्मशान घाट का रास्ता

गांव में अंतिम संस्कार के लिए धान के खेत से होकर एक अस्थायी रास्ता बनाया गया है, जिसकी दूरी मुख्यमंत्री के आवास से लगभग 600 मीटर है। इस पूरे रास्ते में बैनर और पोस्टर लगाए गए हैं, जिन पर गुरुजी को अंतिम जोहार अर्पित किया गया है।

विधानसभा में दी गई श्रद्धांजलि

इससे पहले मंगलवार सुबह रांची स्थित झारखंड विधानसभा में एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई, जिसमें राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो, केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, कांग्रेस नेता दीपिका पांडे सिंह, मंत्री इरफान अंसारी, सुदिव्य सोनू, राधाकृष्ण किशोर सहित सभी दलों के नेताओं और विधायकों ने गुरुजी को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर दो मिनट का मौन भी रखा गया।

दिल्ली से आए मल्लिकार्जुन खरगे और बिहार से तेजस्वी यादव

दिशोम गुरु के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए देशभर से नेता नेमरा पहुंचे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे दोपहर 1:45 बजे रांची पहुंचे, फिर 3:30 बजे नेमरा के लिए रवाना हुए और 4:00 बजे गांव पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। शाम 6:30 बजे वे दिल्ली लौट जाएंगे। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी अंतिम संस्कार में शामिल होने नेमरा पहुंचे।

AAP नेता संजय सिंह भी हुए शामिल

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी गुरुजी को श्रद्धांजलि देने मोरहाबादी स्थित आवास पहुंचे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि दिशोम गुरु ने आदिवासियों, गरीबों और शोषितों की आवाज को संसद तक पहुंचाया।

हेलीपैड और सुरक्षा के खास इंतजाम

वीवीआईपी मेहमानों के लिए नेमरा गांव के समीप लुकैयाटांड़ में हेलीपैड बनाया गया है। वहां से नेमरा तक 7 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए विशेष गाड़ियों की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा की कमान डीसी फैज़ अक अहमद मुमताज और एसपी अजय कुमार ने संभाली है। सभी मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है, ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो।

गांव पहुंचने के लिए टोटो, ऑटो और बसों का सहारा

गुरुजी को श्रद्धांजलि देने के लिए आम लोग टोटो, ऑटो और बसों से गांव पहुंचे हैं। प्रशासन द्वारा छोटे वाहनों की व्यवस्था कर उन्हें मुख्यमंत्री के आवास तक पहुंचाया गया। रामगढ़ से लेकर नेमरा तक हजारों की संख्या में बैनर-पोस्टर लगे हैं, जिनमें गुरुजी को अंतिम जोहार अर्पित किया गया है।

कल्पना सोरेन ने संभाली व्यवस्था, बसंत सोरेन भी रहे मौजूद

सीएम हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने पूरे आयोजन की व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली। वे सुबह ही परिजनों के साथ नेमरा पहुंच गई थीं। इसके बाद बसंत सोरेन भी गांव पहुंचे और अंतिम संस्कार की तैयारी की निगरानी की।

गुरुजी को अंतिम विदाई देने उमड़ा जनसैलाब

गांव में श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ लाखों में पहुंच गई है। रांची से नेमरा तक शव यात्रा के हर पड़ाव पर लोगों ने फूल बरसाकर अंतिम दर्शन किए। “शिबू सोरेन अमर रहें” के नारों से गांव गूंज उठा। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भारी तैनाती की गई है।

दिशोम गुरु का संघर्ष हमेशा रहेगा यादगार

शिबू सोरेन ने झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के लिए वर्षों तक संघर्ष किया। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने और कई बार संसद पहुंचे। उनका जीवन आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लड़ते हुए बीता। आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तब भी उनके विचार और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेंगे।

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