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Social News: वॉशिंगटन से आई ताज़ा वैज्ञानिक रिपोर्ट ने खगोल विज्ञान की दुनिया में जबरदस्त उत्साह भर दिया है। नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने ब्रह्मांड की एक बेहद दुर्लभ और रोमांचक तस्वीर कैद की है, जिसे वैज्ञानिकों ने ‘अपेप’ नाम दिया है। तस्वीर में धूल की घुमावदार सर्पिल संरचनाएं ऐसी दिखती हैं जैसे किसी ब्रह्मांडीय तूफ़ान का जन्म हो रहा हो।
तीन तारे, जिनमें दो अत्यंत दुर्लभ वुल्फ-रायेट
इस सिस्टम में कुल तीन तारे हैं, और इनमें से दो वुल्फ-रायेट तारे हैं। ये तारे बेहद गर्म, अस्थिर और विशाल होते हैं और इनसे निकलने वाली तेज हवाएं कार्बन, हीलियम और नाइट्रोजन से भरा भारी पदार्थ अंतरिक्ष में छोड़ती रहती हैं। दिलचस्प बात यह है कि हमारी मिल्की वे गैलेक्सी में ऐसे तारे सिर्फ लगभग 1,000 ही पाए जाते हैं।
हर 25 साल में बनती है धूल की एक नई सर्पिल
इन दो वुल्फ-रायेट तारों की परिक्रमा 190 साल में पूरी होती है। जब ये तारे एक-दूसरे के करीब आते हैं, तो उनकी हवाएं टकराती हैं और भारी मात्रा में धूल बनती है। यही धूल बाहर फैलते हुए हर 25 साल में एक नई सर्पिल रचना बनाती जाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस अद्भुत दृश्य में जो चार सर्पिलें दिख रही हैं, वे पिछले 700 सालों में बनी संरचनाएं हैं। जेम्स वेब के MIRI उपकरण ने इन्हें पहले से कहीं अधिक साफ तरीके से कैद किया है।
तस्वीर में दिखा तीसरा और भी विशाल तारा
अपेप सिस्टम का तीसरा तारा दोनों वुल्फ-रायेट से भी अधिक विशाल है—सूर्य से लगभग 40–50 गुना भारी। इस तारे की मौजूदगी फैलती धूल में बनने वाली एक खास कैविटी से उजागर होती है, जो हर सर्पिल में एक कीप जैसी आकृति बनाती है।
भविष्य में होगा ब्रह्मांड का विनाशकारी धमाका
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ट्रिपल सिस्टम भविष्य में बेहद विनाशकारी घटनाओं का कारण बनेगा। अनुमान है कि तीनों तारे अपने जीवन के अंत में सुपरनोवा के रूप में विस्फोट करेंगे। दो वुल्फ-रायेट तारे संभवतः गामा-रे बर्स्ट पैदा करेंगे और अंत में ब्लैक होल बन जाएंगे, जबकि तीसरा सुपरजायंट तारा एक न्यूट्रॉन स्टार छोड़ेगा।
मानवता के सामने ब्रह्मांड के रहस्यों की नई झलक
कैलटेक के शोधकर्ता यीनुओ हान ने कहा कि जेम्स वेब की इमेज ने पहली बार इस पूरे सिस्टम को ऐसे उजागर किया है जैसे अंधेरे कमरे में अचानक रोशनी जला दी गई हो। यह खोज बताती है कि ब्रह्मांड में अभी भी ऐसे अनेक रहस्य छिपे हैं, जिन्हें समझने के लिए तकनीक की हर नई छलांग बेहद अहम है।

