Nadia: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का दूसरा चरण लोकतंत्र के उत्सव के बजाय हिंसा के मैदान में तब्दील होता दिख रहा है। नादिया जिले के चापड़ा इलाके से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां भाजपा के पोलिंग एजेंट मोशरफ मीर को बेरहमी से पीटा गया। अस्पताल में भर्ती मोशरफ ने दर्द से कराहते हुए आपबीती सुनाई कि कैसे उन पर घात लगाकर हमला किया गया।

मोशरफ ने बताया कि वह सुबह करीब 5:40 बजे पूरी ईमानदारी के साथ अपनी ड्यूटी के लिए मतदान केंद्र जा रहे थे। उन्होंने कहा, “हम तो बस इतना चाहते थे कि मतदान शांति से हो जाए। लेकिन अचानक टीएमसी के करीब 15-20 लोग, जो एक घर में पहले से छिपे हुए थे, लोहे की रॉड और हथियारों के साथ निकले। उन्होंने मेरे सिर पर रॉड से वार किया और जब मैं गिर गया, तब भी वे मारते रहे।” हां, वहां मौजूद आईएसएफ एजेंटों को भी नहीं बख्शा गया। हमला करने के बाद आरोपी वहां से फरार हो गए।

हिंसा की यह आग सिर्फ नादिया तक सीमित नहीं रही। दक्षिण 24 परगना के भांगर में एआईएसएफ उम्मीदवार नौशाद सिद्दीकी को देखते ही टीएमसी समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे भारी तनाव पैदा हो गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि केंद्रीय बलों को लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा। बसंती में भी भाजपा उम्मीदवार विकास सरदार की गाड़ी में तोड़फोड़ की गई और उनके सुरक्षा गार्ड की बंदूक छीनने तक की कोशिश हुई।

हुगली के खानाकुल में फर्जी एजेंटों की तैनाती को लेकर जमकर पत्थरबाजी और झड़पें हुईं, जबकि हावड़ा के बाली में ईवीएम खराब होने पर हुए विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इन हिंसक घटनाओं के बीच वोट तो डाले जा रहे हैं, लेकिन मतदाताओं के चेहरे पर डर साफ देखा जा सकता है। पुलिस और प्रशासन शांति के दावे तो कर रहे हैं, लेकिन मोशरफ मीर जैसे घायल एजेंटों की हालत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

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