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Interesting News: दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जिन्हें विज्ञान भी आज तक पूरी तरह समझ नहीं पाया है। इन्हीं में से एक है ‘बरमूडा ट्रायंगल’, जिसे डरावनी कहानियों की वजह से ‘डेविल्स ट्रायंगल’ यानी शैतानी त्रिकोण भी कहा जाता है। नॉर्थ अटलांटिक महासागर में मियामी, बरमूडा और प्यूर्टो रिको के बीच फैला यह इलाका दशकों से वैज्ञानिकों और नाविकों के लिए एक दुःस्वप्न बना हुआ है। पिछले 100 सालों में यहाँ से गुजरने वाले सैकड़ों जहाज और विमान अचानक इस कदर गायब हुए कि उनका एक टुकड़ा तक नसीब नहीं हुआ।
इतिहास की वो खौफनाक घटनाएं जिनसे कांप उठी दुनिया!
इस इलाके की रहस्यमयी दास्तां साल 1918 से शुरू होती है, जब अमेरिकी नौसेना का विशालकाय जहाज ‘यूएसए साइक्लोप्स’ 300 यात्रियों के साथ समंदर की लहरों में कहीं खो गया। ताज्जुब की बात यह है कि गायब होने से पहले चालक दल ने कोई इमरजेंसी संदेश तक नहीं भेजा। इसी तरह, 1945 में ‘फ्लाइट 19’ के पांच विमान ट्रेनिंग के दौरान गायब हो गए और उन्हें ढूंढने निकला रेस्क्यू विमान भी कभी वापस नहीं लौटा। इन घटनाओं ने पूरी दुनिया के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर यहाँ होता क्या है?
क्या यह चुंबकीय ताकत है या कोई आसमानी साया?
बरमूडा ट्रायंगल के रहस्यों को लेकर कई तरह की थ्योरी दी जाती हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र का मौसम पलक झपकते ही बदल जाता है। यहाँ उठने वाली गगनचुंबी लहरें और भयानक तूफान किसी भी बड़े जहाज को खिलौने की तरह डुबो सकते हैं। वहीं, कुछ शोधकर्ताओं का दावा है कि समुद्र की सतह के नीचे मीथेन गैस का भंडार है, जो अचानक फटने पर पानी के घनत्व को कम कर देता है और जहाज सीधे गहराई में समा जाते हैं।
मानवीय भूल या यंत्रों की गड़बड़ी?
अक्सर चर्चा होती है कि इस क्षेत्र में चुंबकीय गड़बड़ी की वजह से कंपास गलत दिशा दिखाने लगते हैं, जिससे पायलट रास्ता भटक जाते हैं। हालांकि, आधुनिक वैज्ञानिक इसे केवल मानवीय भूल और खराब मौसम का परिणाम मानते हैं। वजह चाहे जो भी हो, लेकिन आज भी जब कोई पायलट या कप्तान इस त्रिकोण से गुजरता है, तो उसकी धड़कनें तेज हो जाती हैं। आज भी बरमूडा ट्रायंगल एक ऐसा अनसुलझा सवाल है जिसका जवाब समंदर की गहराई में कहीं दफन है।
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