India News: महाराष्ट्र के नगर महापालिका चुनावों के नतीजों ने मुंबई की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। करीब 28 साल तक बीएमसी पर एकछत्र राज करने वाली शिवसेना (यूबीटी) को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा है। वहीं पहली बार Bharatiya Janata Party मुंबई की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। नतीजों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुंबई का अगला मेयर कौन होगा।
बीएमसी में मेयर का चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प और जटिल स्थिति में फंसा हुआ है। भले ही बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई हो, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए उसे Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना के समर्थन की जरूरत है। ऐसे में सत्ता की चाबी अब पूरी तरह शिंदे गुट की बार्गेनिंग पावर पर टिक गई है।
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इस सियासी गणित के बीच मेयर का पद किस वर्ग या श्रेणी के लिए आरक्षित होगा, यह किसी पार्टी के फैसले से नहीं बल्कि लॉटरी सिस्टम से तय होगा। नियमों के मुताबिक बीएमसी मेयर का पद सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, ओबीसी और महिला वर्ग के बीच रोटेशन के आधार पर तय किया जाता है। इस लॉटरी की जिम्मेदारी महाराष्ट्र के शहरी विकास विभाग के पास होती है, जिसका प्रभार खुद एकनाथ शिंदे संभाल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार यह लॉटरी 22 जनवरी को निकाली जा सकती है।
आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद ही यह तय होगा कि कौन-कौन से पार्षद मेयर पद की दौड़ में उतर सकते हैं। मुंबई को करीब चार साल बाद निर्वाचित मेयर मिलने जा रहा है। इससे पहले शिवसेना की किशोरी पेडनेकर इस पद पर थीं। बीएमसी में कुल 227 निर्वाचित पार्षद होते हैं, जिन्हें नगरसेवक कहा जाता है। मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है, जबकि पार्षद पांच साल के लिए चुने जाते हैं।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक 28 जनवरी को नवनिर्वाचित पार्षदों की विशेष बैठक बुलाई जा सकती है, जिसमें मेयर और उपमेयर पद के लिए मतदान होगा। इस बार सत्ता का समीकरण इसलिए भी अहम है क्योंकि बीएमसी में केवल राजनीतिक विंग ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक विंग यानी नगर आयुक्त की भूमिका भी बेहद प्रभावशाली होती है।
बीजेपी पहली बार मुंबई में अपना मेयर बनाने की पूरी कोशिश में जुटी है, लेकिन स्पष्ट बहुमत न होने के कारण उसे शिंदे गुट पर निर्भर रहना पड़ रहा है। वहीं शिंदे गुट की नजर बीएमसी के अहम पदों और स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन पद पर टिकी हुई है।
इस चुनाव को और दिलचस्प बनाने वाला एक अहम फैक्टर मार्च 2023 में हुआ अधिनियम संशोधन भी है। इसके तहत नामांकित पार्षदों की संख्या 5 से बढ़ाकर 10 कर दी गई है। सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण बीजेपी को इन नामांकित सदस्यों का फायदा मिल सकता है, जो मेयर चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
आने वाला एक सप्ताह मुंबई की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। आरक्षण की लॉटरी और गठबंधन की सौदेबाजी यह तय करेगी कि देश की सबसे अमीर महानगर पालिका का रिमोट कंट्रोल आखिर किसके हाथ में जाएगा।



