रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का 15वां दिन तकनीक और पारदर्शिता के नाम रहा। सदन की कार्यवाही के दौरान सोमवार को उस समय माहौल दिलचस्प हो गया जब अनुभवी विधायक सरयू राय ने सार्वजनिक सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि आखिर झारखंड की जनता को स्मार्ट और हाई-टेक सरकारी सेवाएं कब तक मिलेंगी?

मंत्री का आश्वासन : बैठकों का दौर जारी

सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री दीपक बिरुआ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार तकनीक के मामले में पीछे नहीं रहना चाहती। उन्होंने सदन को बताया कि विभाग AI के प्रभावी उपयोग को लेकर बेहद गंभीर है। बिरुआ ने जानकारी दी कि हाल ही में AI के रोडमैप को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बैठक के निष्कर्षों के आधार पर जल्द ही एक ठोस कार्ययोजना (Blueprint) तैयार कर ली जाएगी, जिससे सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और रफ्तार आएगी।

सरयू राय की दो टूक : ‘सिर्फ बैठकों से काम नहीं चलेगा’

हालांकि, मंत्री के इस जवाब से सरयू राय संतुष्ट नजर नहीं आए। उन्होंने तल्ख अंदाज में कहा कि केवल “बैठकें” करना काफी नहीं है। राय ने तर्क दिया कि दुनिया तेजी से बदल रही है और झारखंड को प्रशासनिक सुधारों के लिए AI जैसी तकनीक की सख्त जरूरत है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वे केवल फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि एक स्पष्ट ‘डिजिटल रोडमैप’ पेश करें ताकि आम नागरिक को जाति प्रमाण पत्र से लेकर राशन कार्ड तक की सेवाओं में AI का लाभ मिल सके।

क्या होगा बदलाव

मंत्री दीपक बिरुआ ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार का अंतिम लक्ष्य नई तकनीक के जरिए भ्रष्टाचार को कम करना और सेवाओं को ‘नागरिक-हितैषी’ बनाना है। विशेषज्ञों की राय ली जा रही है ताकि स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में AI का सहारा लेकर झारखंड को एक मॉडल स्टेट बनाया जा सके।

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