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India News: कोलकाता की राजनीति में मंगलवार का दिन बेहद उथल-पुथल भरा रहा। नदिया जिले के कृष्णनगर में ममता बनर्जी की रैली वैसे तो आम राजनीतिक भाषण की तरह शुरू हुई, लेकिन कुछ ही मिनटों में उनका तेवर पूरी तरह बदल गया। मंच से उन्होंने जिस अंदाज़ में चेतावनी दी, उससे साफ दिखा कि SIR को लेकर बंगाल की राजनीति किस मोड़ पर पहुंच चुकी है। ममता ने कहा, “अगर SIR के बहाने मुझ पर हमला करने की कोशिश की गई, तो मैं पूरे देश में बीजेपी की नींव हिला दूंगी।” भीड़ में बैठे लोग कुछ पल के लिए चुप हो गए—ये बयान सीधा केन्द्र पर तीर जैसा जा गिरा था।
“बंगाल को टारगेट किया जा रहा है” – ममता का आरोप
ममता ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार दोनों पर उंगली उठाई। उनका आरोप था कि SIR (स्पेशल समरी रिवीजन) प्रक्रिया को हथियार बनाकर बंगाल के मतदाताओं, खासकर मतुआ और बंगालीभाषी समुदाय को डराया जा रहा है। उन्होंने कहा, “2024 में जिन्होंने वोट दिया, क्या वे अचानक अवैध हो गए? अगर वे अवैध हैं तो फिर केंद्र की वैधता कैसे तय होती है?” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुआ।
सीएए और फर्जी नागरिकता सर्टिफिकेट पर बड़ा दावा
मतुआ इलाकों में रैली के दौरान ममता ने बड़ा आरोप लगाया कि बीजेपी से जुड़े संगठन नागरिकता के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्र बांट रहे हैं।
उनके मुताबिक—
● लोगों को बांग्लादेशी बताया जा रहा है,
● सीएए के नाम पर जनता को बहकाया जा रहा है,
● और जो खुद को बांग्लादेशी बताकर फॉर्म भर देंगे, उनका वोटर नाम काट दिया जाएगा।
ममता ने कहा कि यह “सबसे बड़ा धोखा” है और इसे रोकना ही होगा।
बीजेपी का पलटवार: “घुसपैठियों की वजह से ममता परेशान”
दूसरी तरफ बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि SIR के जरिए सिर्फ फर्जी वोटरों और घुसपैठियों को हटाया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि ममता इसलिए परेशान हैं क्योंकि उनका पूरा वोट बैंक ही इसी पर टिके होने का आरोप झेलता है। ममता द्वारा गुजरात चुनाव हारने जैसे बयान को भी बीजेपी ने “राजनीतिक हताशा” बताया।
ममता का दावा: “35 से ज्यादा मौतें हो चुकीं, कोई आत्महत्या न करे”
SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद से बढ़ते तनाव के बीच ममता ने दावा किया कि अब तक 35–36 लोगों की मौतें हो चुकी हैं, जिनमें कई आत्महत्याएं भी शामिल हैं। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया— “कोई भी असली मतदाता लिस्ट से नहीं हटेगा। डरकर जान मत दीजिए। हम सबके साथ खड़े हैं।”
इसके साथ ही ममता ने चुनाव आयोग पर यह भी आरोप लगाया कि उसने SIR प्रक्रिया को सिर्फ दो महीनों में पूरा करने का दबाव डाला है, जबकि 2002 में यही प्रक्रिया तीन साल चली थी।
28 नवंबर को चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा टीएमसी प्रतिनिधि दल
टीएमसी ने चुनाव आयोग को विस्तृत शिकायत भेजी थी, जिस पर आयोग ने 28 नवंबर को 10 सदस्यीय टीएमसी प्रतिनिधिमंडल को बैठक का समय दे दिया है। इसमें डेरेक ओ’ब्रायन, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी, साकेत गोखले जैसे चेहरे शामिल होंगे। टीएमसी का कहना है कि 2026 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर राजनीतिक फेरबदल किया जा रहा है।
13.92 लाख फॉर्म ‘अनकलेक्टेबल’, तीन बीएलओ की मौत
चुनाव आयोग ने खुलासा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान अभी तक 13.92 लाख ऐसे फॉर्म मिले हैं जिनके मतदाता—
● या मृत हैं
● या दो जगह नाम दर्ज है
● या स्थायी रूप से बाहर चले गए
● या लंबे समय से अपने पते पर नहीं मिल रहे।
ये आंकड़ा सोमवार को 10.33 लाख था, यानी संख्या लगातार बढ़ रही है। इस प्रक्रिया में 80,600 से ज्यादा बीएलओ और हजारों अधिकारी तैनात हैं। इसी दौरान तीन बीएलओ की मौत भी दर्ज हुई, जिसे लेकर ममता ने आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।

