Jharkhand News: झारखंड के हटिया निवासी और ठेठ नागपुरी संगीत के अद्भुत साधक महावीर नायक को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा नई दिल्ली में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। उनकी इस उपलब्धि पर पूरे झारखंड में हर्ष और गर्व की लहर है।

महावीर नायक को यह सम्मान उनके दशकों लंबे समर्पण, कला साधना और नागपुरी संस्कृति को संरक्षित और प्रचारित करने के लिए दिया गया है। उन्हें “भिनसरिया राग के राजा” की उपाधि प्राप्त है और उन्होंने 1962 से नागपुरी लोकसंगीत को अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके गीतों में झारखंड की मिट्टी, संस्कृति, परंपराएं और समाज की जीवंत झलक मिलती है।

विजय शंकर नायक, जो आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष हैं और पूर्व विधायक प्रत्याशी भी रह चुके हैं, ने महावीर नायक को पद्मश्री मिलने पर बधाई दी। उन्होंने इसे झारखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा, “यह सम्मान सिर्फ महावीर नायक की उपलब्धि नहीं है, यह झारखंड की आत्मा – उसकी संस्कृति और कला – की अंतरराष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है।”

विजय शंकर नायक ने कहा कि यह सम्मान खासकर आदिवासी-मूलवासी समाज और घासी समाज के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण है, क्योंकि महावीर नायक ने संगीत के माध्यम से समाज की आवाज़ को एक मंच दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि झारखंड में इस उपलब्धि को लेकर विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें नागपुरी और भिनसरिया राग को बढ़ावा देने वाले अन्य कलाकारों को भी सम्मानित किया जाएगा।

विशेष स्वागत समारोह की तैयारी

महावीर नायक 29 मई 2025 को शाम 4:30 बजे बिरसा मुंडा हवाई अड्डा, रांची पहुंचेंगे। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उनका भव्य स्वागत ढोल-नगाड़ा, मांदर, भेइर और पारंपरिक झारखंडी वाद्य यंत्रों के साथ किया जाएगा। इस स्वागत में झारखंड के सभी जिलों से लोग भाग लेंगे और इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनेंगे।

श्री नायक ने विशेष रूप से झारखंडी समाज, खासकर घासी समाज के लोगों से अपील की है कि वे इस स्वागत समारोह में बड़ी संख्या में उपस्थित होकर अपने लोक कलाकार के सम्मान में भाग लें। यह आयोजन न केवल महावीर नायक के लिए सम्मान का प्रतीक होगा, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक अस्मिता को सशक्त बनाने का अवसर भी होगा।

महावीर नायक – एक प्रेरणा

महावीर नायक का संगीत झारखंड के ग्रामीण अंचलों की आत्मा से जुड़ा रहा है। उनके गीतों में लोकधुनों की मिठास के साथ-साथ सामाजिक संदेश भी होता है। उन्होंने नागपुरी गीतों को केवल लोक स्तर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान दिलाई है। उनका संगीत युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बना है।

विजय शंकर नायक ने अंत में कहा, “महावीर नायक का यह सम्मान झारखंड के प्रत्येक नागरिक के लिए गर्व की बात है। उन्होंने हटिया को ही नहीं, पूरे झारखंड को गौरवान्वित किया है। उनकी उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को यह सीख देती है कि हमारी जड़ें, हमारी संस्कृति, हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं।”

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