India News: देश के कई राज्यों में चल रही एसआईआर की प्रक्रिया के बीच सुप्रीम कोर्ट में इस समय एक बड़ा सवाल छाया हुआ है—क्या आधार कार्ड नागरिकता साबित करता है या नहीं? कोर्ट में लगातार दलीलें चल रही हैं। इसी माहौल के बीच महाराष्ट्र सरकार ने एक ऐसा कदम उठा दिया है जिसने देशभर का ध्यान खींच लिया।
2023 के बाद बने सभी प्रमाणपत्र अमान्य
राज्य सरकार ने साफ आदेश दिया है कि 11 अगस्त 2023 के बाद सिर्फ आधार कार्ड के आधार पर बने सभी जन्म प्रमाणपत्र रद्द माने जाएंगे। ये दस्तावेज अब किसी सरकारी प्रक्रिया में वैध नहीं होंगे। सरकार का सीधा तर्क है कि कई जगहों पर आधार कार्ड दिखाकर नकली जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाए जा रहे थे। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इन्हीं संदिग्ध प्रमाणपत्रों को चिन्हित कर सभी को रद्द करने का निर्देश दिया है। साथ ही उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी जिन्होंने बिना उचित जांच ऐसे प्रमाणपत्र जारी किए।
नई वेरिफिकेशन गाइडलाइन लागू
रेवेन्यू विभाग ने सभी जिलों और उप-मंडलों को 16 पॉइंट वाली वेरिफिकेशन गाइडलाइन जारी की है। इसमें साफ कहा गया है कि कोई भी जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र अब आधार पर निर्भर नहीं होगा। अन्य मूल दस्तावेज आवश्यक होंगे।
सुप्रीम कोर्ट में मुद्दा अभी अधर में
बिहार में एसआईआर के दौरान भी यह विवाद उठा था कि आधार को पहचान और निवास का सही दस्तावेज माना जाए या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से इसे दस्तावेजों की सूची में शामिल करने को कहा था, लेकिन इसका मतलब नागरिकता का प्रमाण नहीं। सरकार और चुनाव आयोग का साफ कहना है कि सिर्फ आधार होने से नागरिकता साबित नहीं हो जाती। कई राज्यों—खासकर पश्चिम बंगाल—में गैरकानूनी घुसपैठ करने वालों के आधार बन जाने के कई उदाहरण मिल चुके हैं। यह फैसला आने वाले समय में देशभर की नीतियों पर असर डाल सकता है।



