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Health Desk: आज के दौर में तनाव (Stress) हर उम्र के व्यक्ति की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। बच्चे अपनी पढ़ाई को लेकर चिंतित हैं, युवा करियर की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं और वयस्क अपनी निजी व पेशेवर जिंदगी के बीच संतुलन बनाने की जद्दोजहद में हैं। अधिकांश लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि यही ‘नॉर्मल’ दिखने वाला तनाव धीरे-धीरे शरीर और दिमाग दोनों को भीतर से खोखला कर रहा है।
मानसिक स्वास्थ्य पर पहला वार
एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक तनाव में रहने का सबसे बुरा असर मेंटल हेल्थ पर पड़ता है। अत्यधिक स्ट्रेस के कारण एंजायटी, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन और अनिद्रा (नींद न आना) जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। तनाव बढ़ने से व्यक्ति में नकारात्मक विचार हावी होने लगते हैं और ध्यान केंद्रित करना कठिन हो जाता है। यदि समय रहते इसे न संभाला जाए, तो यह गंभीर मानसिक विकारों का रूप ले सकता है।
दिल और पाचन तंत्र के लिए खतरा
तनाव का सीधा असर हमारे दिल पर होता है। जब शरीर तनाव में होता है, तो कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट तेज हो जाती है। लंबे समय तक यह स्थिति रहने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, तनाव पाचन एंजाइम्स के संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे गैस, एसिडिटी और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
कमजोर होती इम्यूनिटी और अन्य समस्याएं
लगातार स्ट्रेस लेने से शरीर का इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कमजोर हो जाता है, जिससे व्यक्ति जल्दी-जल्दी संक्रमण और बीमारियों की चपेट में आने लगता है। मांसपेशियों में दर्द, थकान और हार्मोनल असंतुलन इसके अन्य परिणाम हैं। महिलाओं में यह पीरियड्स संबंधी दिक्कतों को बढ़ा सकता है।
कैसे करें बचाव?
विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव को पूरी तरह खत्म करना तो मुमकिन नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित जरूर किया जा सकता है। नियमित योग, ध्यान (Meditation), प्राणायाम, पर्याप्त नींद और पौष्टिक आहार के जरिए मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है। समय पर आराम और अपनी पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालना भी तनाव कम करने में मददगार साबित होता है।
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