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Health News: कभी बुढ़ापे की बीमारी माना जाने वाला ‘हार्ट अटैक’ अब भारतीय युवाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। आज 20 से 40 साल की उम्र के युवा बड़ी संख्या में दिल की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जीवनशैली में सुधार और जागरूकता की कमी को दूर नहीं किया गया, तो यह समस्या देश में एक महामारी का रूप ले सकती है।
तनाव और नींद की कमी का घातक कॉम्बिनेशन
हृदय रोगों के पीछे आनुवंशिक और पारिवारिक इतिहास तो एक बड़ा कारण है ही, लेकिन युवाओं में इसका सबसे प्रमुख कारण अत्यधिक मानसिक तनाव है। लगातार लंबे समय तक काम करना, अनियमित नींद का पैटर्न, धूम्रपान (Smoking) और शारीरिक गतिविधियों का अभाव यानी आरामदेह जीवनशैली इस जोखिम को कई गुना बढ़ा रही है।
ओपन हार्ट सर्जरी में 25% का उछाल
देश के हृदय अस्पतालों में हर साल दो लाख से अधिक ओपन हार्ट सर्जरी की जा रही हैं, जिसमें सालाना 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्जरी केवल तात्कालिक राहत देती है; मौतों को रोकने का एकमात्र तरीका हृदय रोग के जोखिम कारकों के प्रति शिक्षित होना और बचाव करना है।
पहचानें ‘अनजान’ लक्षण: जरूरी नहीं कि सिर्फ सीने में दर्द हो
डॉक्टरों के अनुसार, हर मरीज में लक्षण एक जैसे नहीं होते। सीने में दर्द (एंजाइना) के अलावा भी कई संकेत हो सकते हैं:
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अपच जैसी असहजता: कई बार लोग इसे गैस समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
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दर्द का फैलाव: दर्द सीने के बीच से शुरू होकर बाहों, जबड़े, गर्दन या पेट तक फैल सकता है।
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अचानक पसीना और चक्कर: बिना किसी मेहनत के पसीना आना, मतली या सांस लेने में तकलीफ होना गंभीर संकेत हैं।
कैसे करें बचाव?
कोरोनरी हृदय रोग को पूरी तरह ठीक करना मुश्किल है, लेकिन जीवनशैली में बदलाव, सही दवाओं और समय पर जाँच से इसे प्रबंधित किया जा सकता है। धमनियों के पूरी तरह ब्लॉक होने से पहले लक्षणों को पहचानना ही जीवन बचा सकता है।
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