Ranchi News : रांची में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने शनिवार को प्रेस वार्ता में केंद्र की मोदी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर आजादी के समय भाजपा का शासन होता तो देश के पिछड़े, दलित, आदिवासी और वंचित समाज को संविधान में आरक्षण और उनके मूल अधिकार नहीं मिल पाते।
यादव ने झारखंड में पिछड़ों के लिए आरक्षण सीमा बढ़ाने के विधेयक को केंद्र सरकार द्वारा लटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि झारखंड में लगभग 55% और पूरे देश में 52% आबादी पिछड़ों की है। संविधान में स्पष्ट रूप से प्रावधान है कि पिछड़े वर्गों को शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए आरक्षण दिया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने शुरू किया संघर्ष, 50% सीमा हटाने की मांग
प्रदीप यादव ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में “जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” का नारा देकर वंचित समाज को उनका हक दिलाने की लड़ाई छेड़ी गई है। उनका मानना है कि 50% आरक्षण की सीमा हटाए बिना यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने इसे आरक्षण की “लक्ष्मण रेखा” बताया, जिसे मिटाना बेहद जरूरी है।
तमिलनाडु का उदाहरण और केंद्र सरकार से सवाल
यादव ने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 76वें संविधान संशोधन के बाद आरक्षण सीमा को 79% तक बढ़ाया गया है और इसे नौवीं अनुसूची में शामिल कर कानून का रूप दिया गया। इसी तरह केंद्र सरकार ने 10% ईडब्ल्यूएस आरक्षण देकर 50% की सीमा को तोड़ा है, तो फिर पिछड़ों के लिए इस सीमा को क्यों नहीं हटाया जा सकता?
उन्होंने बताया कि झारखंड, कर्नाटक, हरियाणा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ जैसे कई राज्यों की विधानसभा ने भी आरक्षण सीमा बढ़ाने का प्रयास किया है। लेकिन केंद्र सरकार संविधान में आवश्यक संशोधन किए बिना इसे लागू नहीं कर रही है।
कांग्रेस का केंद्र सरकार पर सीधा हमला
प्रदीप यादव ने कहा कि भाजपा सरकार पिछड़े वर्गों के अधिकारों को दबा रही है। अगर कांग्रेस सत्ता में आती है, तो पिछड़ों, दलितों और वंचितों की जनसंख्या के अनुसार आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए संविधान संशोधन किया जाएगा।



