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Ranchi : राजधानी रांची से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तुपुदाना ओपी की पूर्व प्रभारी दारोगा मीरा सिंह को अभियुक्त बनाया है। यह कदम कांड संख्या ECIR 8/2025 में उठाया गया है, जिसके तहत ED ने प्रॉसिक्यूशन कंप्लेन (PC) दाखिल की है। फिलहाल कोर्ट ने इस PC पर संज्ञान नहीं लिया है।
छापेमारी में बरामद हुई थी भारी नकदी
गौरतलब है कि मार्च 2024 में ED ने मीरा सिंह और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान एजेंसी को 12.50 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के एक ट्रैप केस से जुड़ी थी, जिसे बाद में ED ने अपने अधीन ले लिया। ED के अनुसार, इस बरामदगी और केस की जांच से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर पाया गया कि मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका है। इसी कारण मीरा सिंह को अभियुक्त बनाते हुए प्रॉसिक्यूशन कंप्लेन दाखिल की गई है।
पहली पुलिस अधिकारी बनीं अभियुक्त
इस केस की एक बड़ी खासियत यह है कि मीरा सिंह झारखंड की पहली पुलिस अधिकारी हैं जिन्हें ED ने किसी मामले में आरोपी बनाया है। इससे पहले तक ED की जांच आमतौर पर राजनेताओं, ठेकेदारों, कारोबारी वर्ग और नौकरशाहों तक सीमित रही है। ऐसे में किसी सक्रिय पुलिस अधिकारी का नाम आरोपी के रूप में शामिल होना पूरे पुलिस महकमे के लिए चौंकाने वाला है।
ACB केस में जमानत पर
जानकारी के अनुसार, ACB ने पहले ही मीरा सिंह को ट्रैप केस में आरोपी बनाया था। उस केस में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था, लेकिन फिलहाल वे जमानत पर बाहर हैं। अब ED ने उसी केस को टेकओवर करते हुए प्रॉसिक्यूशन कंप्लेन दाखिल की है। हालांकि, जब तक कोर्ट संज्ञान नहीं लेता, तब तक आगे की कार्रवाई लंबित रहेगी।
क्या है अगला कदम?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट संज्ञान लेने के बाद ही ED की ओर से दर्ज अभियुक्त की स्थिति पुख्ता मानी जाएगी। इसके बाद ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी। फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि ED के इस कदम के बाद मीरा सिंह के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई संभव है और क्या नए साक्ष्य सामने आते हैं।
प्रशासनिक हलकों में हलचल
ED की इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में खलबली मच गई है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अगर एक दारोगा स्तर की अधिकारी को इस तरह अभियुक्त बनाया जा सकता है, तो आगे ऐसे मामलों में और भी कड़े कदम उठ सकते हैं। इससे पूरे राज्य में पुलिस और प्रशासनिक तंत्र पर निगरानी और भी सख्त होने की संभावना जताई जा रही है।
जनता में चर्चा का विषय
इस मामले ने आम जनता का भी ध्यान खींचा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिस पुलिस पर भ्रष्टाचार रोकने की जिम्मेदारी है, वही अगर ऐसे मामलों में शामिल पाई जाती है तो कानून व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल उठना लाजिमी है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि ED की यह कार्रवाई भविष्य में सिस्टम को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में सकारात्मक साबित हो सकती है।

