Patna News: बिहार की राजनीति में लालू परिवार कोई नया नाम नहीं, लेकिन इस बार मामला घर के अंदर से ही भड़क उठा है। रोहिणी आचार्य ने जो आरोप लगाए—घर से निकालने, चप्पल दिखाने और गाली-गलौज तक—उन्होंने सिर्फ परिवार ही नहीं, पूरी आरजेडी की साख को झकझोर दिया है। रोहिणी जब आवास से निकलीं, तो बाकी तीनों बहनें भी वहां से हट गईं। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी की ओर से इस विवाद पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

चुनावी हार और आरोपों ने बढ़ाया दबाव

इस घरेलू तनाव के साथ आरजेडी पहले ही चुनावी हार के सदमे में है। तेजस्वी यादव, जिन्हें कभी सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था, अब 25 सीटों पर सिमटकर दबाव में हैं। सवाल अब सिर्फ पार्टी के भीतर ही नहीं, बल्कि परिवार के भीतर से उठ रहे हैं। रोहिणी का बयान, तेजप्रताप की नाराजगी और मीसा-तेजस्वी के बीच लंबे समय से चली आ रही अनबन—इन सबने पार्टी की सेहत खराब कर दी है।

सियासत में बढ़ती शक-सवाल की परतें

रोहिणी ने सीधे उन नामों पर उंगली उठाई जो चुनावी रणनीति में तेजस्वी के सबसे करीब माने जाते हैं—संजय यादव और रमीज़ नेमत खान। हार के बाद कौन जिम्मेदार इस सवाल पर पार्टी की खामोशी और गहरी हो गई है। इतना ही नहीं, ‘लैंड फॉर जॉब’ केस की कानूनी तलवार भी लालू परिवार के ऊपर तनी हुई है।

क्या बंटवारे की नौबत आ सकती है?

बीजेपी भी हालात पर नजर रखे हुए है। तेजप्रताप को अचानक “वाई” श्रेणी की सुरक्षा मिलना राजनीतिक हलकों में चर्चा का नया विषय बन गया है। लालू यादव के नौ बच्चों में से चार सक्रिय राजनीति में हैं—और हर किसी की अपनी महत्वाकांक्षा है। यही वजह है कि संघर्ष अब ढका-छिपा नहीं, बल्कि खुलकर सामने आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि रोहिणी के आरोप सिर्फ नाराजगी नहीं, बल्कि परिवार के भीतर गहरे मतभेद का संकेत हैं। सवाल अब यह है कि मामला यहीं थमेगा या परिवार और पार्टी के लिए बड़ा संकट बनने वाला है।

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