Bihar News: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आईआरसीटीसी घोटाले मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने कहा कि रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार किया। यह फैसला विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आया है, जिससे राजनीतिक समीकरणों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
राजद को झटका, एनडीए को बढ़त
तेजस्वी यादव जहां महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में चुनावी मैदान में हैं, वहीं यह फैसला एनडीए के लिए बड़ा हथियार बन गया है। भाजपा और जदयू अब ‘भ्रष्टाचार बनाम सुशासन’ के एजेंडे पर जनता के बीच प्रचार तेज करने की तैयारी में हैं। एनडीए के नेताओं का कहना है कि यह फैसला राजद के भ्रष्टाचार के इतिहास की पुष्टि करता है।
कांग्रेस के सामने दो रास्ते
कोर्ट के फैसले के बाद महागठबंधन की सबसे बड़ी सहयोगी कांग्रेस अब रणनीतिक मोड़ पर खड़ी है। राहुल गांधी के पास यह मौका है कि वे महागठबंधन में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाकर अपनी ‘ईमानदार नेतृत्व’ की छवि पेश करें। इससे कांग्रेस को सीट शेयरिंग और चुनावी एजेंडा तय करने में मजबूत स्थिति मिल सकती है।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस इस मुद्दे पर ज्यादा आक्रामक होती है, तो राजद के साथ टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे गठबंधन में दरार भी पड़ सकती है।
राहुल गांधी की रणनीति बनेगी निर्णायक
रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आंतरिक चर्चा शुरू कर दी है। पार्टी यह तय कर रही है कि तेजस्वी यादव को सीएम फेस बनाए रखना सही होगा या नहीं। राहुल गांधी ने हाल ही में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के जरिए बिहार में अपना राजनीतिक आधार मजबूत किया है, और ऐसे में उनकी अगली रणनीति तय करेगी कि कांग्रेस गठबंधन में निर्णायक भूमिका निभा पाती है या नहीं।
एनडीए का राजनीतिक नैरेटिव तैयार
वहीं, एनडीए कोर्ट के आदेश को जनता के बीच मुद्दा बनाकर ‘भ्रष्टाचार मुक्त शासन’ का नैरेटिव गढ़ने में जुट गया है। भाजपा और जदयू नेताओं के लिए यह मौका तेजस्वी की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न उठाने का है, जिससे चुनावी मुकाबला और तीखा हो सकता है।
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