Health News: पेट की चर्बी को अक्सर हम एक ही समस्या मानते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नाभि के ऊपर और नीचे जमा फैट न केवल अलग-अलग तरह का होता है, बल्कि इसके बनने के कारण भी बिल्कुल भिन्न हैं। आयुर्वेद में भी इन दोनों फैट (चर्बी) के कारणों को अलग-अलग दोषों से जोड़ा गया है।
ऊपरी चर्बी: कोर्टिसोल और तनाव का नतीजा
नाभि के ऊपर जमा चर्बी, जिसे विसरल फैट कहा जाता है, मुख्य रूप से तनाव और कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ने की वजह से जमा होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा चाय-कॉफी पीना, देर रात तक जागना, और वसायुक्त खाद्य पदार्थ खाना इसे बढ़ावा देते हैं। आयुर्वेद में इसे पित्त-वात असंतुलन का संकेत माना गया है। यह फैट दिल की बीमारियों, हाई बीपी और डायबिटीज का बड़ा कारण बन सकता है।
निचली चर्बी: हार्मोन और सुस्त पाचन का संकेत
वहीं, निचले पेट की चर्बी हार्मोनल असंतुलन, कम सक्रिय जीवनशैली और कमजोर पाचन से जुड़ी होती है। महिलाओं में यह अक्सर एस्ट्रोजन असंतुलन से, जबकि पुरुषों में बैठकर काम करने और रात में भारी भोजन लेने से बढ़ती है। आयुर्वेद में इसे कफ संचय का संकेत माना जाता है। यह चर्बी कब्ज, ब्लोटिंग और कमर दर्द जैसी परेशानियां बढ़ा सकती है।
आयुर्वेदिक समाधान: घी मसाज और वज्रासन
अच्छी बात यह है कि दोनों तरह की चर्बी को प्राकृतिक रूप से कंट्रोल किया जा सकता है:
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ऊपरी फैट के लिए: सुबह खाली पेट जीरा, धनिया और सौंफ का पानी पीने से कोर्टिसोल कम होता है। तनाव घटाने के लिए अनुलोम-विलोम प्राणायाम भी असरदार है।
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निचले फैट के लिए: रात को सोने से 1 घंटे पहले गुनगुना पानी गैस और फैट कम करता है। नाभि के आसपास 5 मिनट का घी मसाज ब्लोटिंग घटाने में मदद करता है।
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सामान्य नियम: भोजन के बाद 5-10 मिनट वज्रासन में बैठना और रात का खाना 8 बजे से पहले हल्का खाना पूरे पेट को डिटॉक्स करता है। त्रिकटु चूर्ण और कच्चा पपीता जैसे खाद्य पदार्थ भी जिद्दी फैट बर्न करने में सहायक हैं।



