Lohardaga News: लोहरदगा जिले के पेशरार थाना क्षेत्र के केकरांग बर टोली गांव में डायन-बिसाही के शक में एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इस वीभत्स घटना पर झारखंड उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया है और तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के कार्यकारी अध्यक्ष और हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए लोहरदगा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पीडीजे) राजकमल मिश्रा को निर्देश दिया कि वे इस प्रकरण पर सघन पहल करें और पीड़ित परिवार को आवश्यक सहायता दिलवाएं।

इसके बाद पीडीजे राजकमल मिश्रा ने लोहरदगा के एसपी सादिक अनवर रिजवी और एसडीपीओ वेदांत शंकर के साथ आपात बैठक की। बैठक में हत्या की जांच की स्थिति, पुलिस की कार्रवाई और पीड़ित परिवार की सुरक्षा पर विस्तृत चर्चा की गई।

डालसा की टीम मौके पर पहुंची और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। टीम ने पूरी घटना की रिपोर्ट तैयार कर झालसा, रांची को भेजी। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद के निर्देश पर पीड़ित परिवार को तत्काल राहत के रूप में ₹20,000 की सहायता राशि प्रदान की गई। यह राशि डालसा सचिव राजेश कुमार ने स्वयं पीड़िता सुखमनिया कुमारी को सौंपते हुए दी।

इस दौरान एसडीपीओ वेदांत शंकर, डालसा पैनल अधिवक्ता लाल धर्मेंद्र देव, इंद्राणी कुजूर, और पीएलवी सदस्य गौतम लेनिन, संतोष भगत, सुनेश्वर उरांव और शारूक कुंवर गोप मौजूद रहे।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले डायन-बिसाही के शक में गांव के ही लोगों ने एक परिवार के पति, पत्नी और 9 वर्षीय बच्चे की बेरहमी से हत्या कर दी थी। इस जघन्य वारदात ने झारखंड में अंधविश्वास की गहरी जड़ों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि पीड़ित परिवार को न्याय जल्द मिलेगा। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की है और गांव में लगातार छापेमारी की जा रही है।

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