रांची: झारखंड के लगभग 45 हजार आकलन-प्रशिक्षित सहायक अध्यापकों (पारा शिक्षकों) के लिए बुधवार का दिन खुशियों की सौगात लेकर आया। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे शिक्षकों और राज्य सरकार के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में कई सकारात्मक निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर आयोजित इस बैठक ने यह साफ कर दिया है कि सरकार शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और उनके भविष्य को लेकर गंभीर है।

अनुकंपा नियुक्ति पर बनी सहमति : अगले कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव

बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘अनुकंपा नियुक्ति’ (Compassionate Appointment) के प्रस्ताव पर बनी सहमति रही। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि सेवा अवधि के दौरान किसी सहायक अध्यापक का असामयिक निधन हो जाता है, तो उनके आश्रित परिवार को बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा। परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का औपचारिक प्रस्ताव आगामी कैबिनेट बैठक में पेश किया जाएगा। इस फैसले से राज्य के हजारों शिक्षक परिवारों में सुरक्षा की भावना जगी है।

मंत्रियों ने बढ़ाया हौसला : “निश्चिंत होकर करें काम”

बैठक में सरकार की ओर से अधिकृत मंत्री इरफान अंसारी और शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने मोर्चा के प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया। मंत्रियों ने कहा, “शिक्षक राज्य की नींव हैं, वे निश्चिंत होकर बच्चों को पढ़ाएं। सरकार समाधान निकालने के लिए पूरी तरह गंभीर है और किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।” बैठक में शिक्षा विभाग के आला अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि सहायक अध्यापकों से जुड़ा मामला वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में लंबित है। सरकार ने पारदर्शी रुख अपनाते हुए कहा कि न्यायालय का जो भी अंतिम फैसला आएगा, उसके मात्र पांच दिनों के भीतर दोबारा उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जाएगी। उस बैठक में कोर्ट के आदेश के आलोक में आगे की ठोस रणनीति तैयार की जाएगी।

संघर्ष मोर्चा ने जताया आभार

बैठक के बाद ‘झारखंड राज्य आकलन-प्रशिक्षित सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा’ के प्रतिनिधियों ने चेहरे पर मुस्कान के साथ बाहर आकर संतोष जताया। उन्होंने सरकार के इस सकारात्मक और संवदेनशील रुख का स्वागत किया है। शिक्षकों का मानना है कि अनुकंपा नियुक्ति का निर्णय उनके संघर्ष की बड़ी जीत है।

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