रांची : झारखंड में लोकतंत्र के सबसे छोटे और महत्वपूर्ण पड़ाव यानी नगर निकाय चुनावों का बिगुल बज चुका है। राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने मंगलवार को एक प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि राज्य के सभी 48 नगर निकायों में 23 फरवरी 2026 को एक साथ मतदान कराया जाएगा। चुनाव की घोषणा के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है, जिससे नई योजनाओं और घोषणाओं पर फिलहाल रोक लग गई है।
चुनाव का पूरा शेड्यूल : एक नज़र में
निर्वाचन आयोग के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया 29 जनवरी से नामांकन के साथ शुरू होगी, जो 4 फरवरी तक चलेगी। इसके बाद 5 फरवरी को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 6 फरवरी तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। 7 फरवरी को चुनाव चिह्नों के आवंटन के बाद चुनावी रण पूरी तरह सज जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 27 फरवरी को मतगणना होगी और उसी दिन परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे।
मतदाता और मतदान की प्रक्रिया
इस बार के चुनाव में लगभग 43.33 लाख मतदाता अपने वोट की ताकत से ‘नगर सरकार’ चुनेंगे। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर (मतपत्र) के जरिए होंगे। मतदाताओं की सुविधा के लिए मतपत्रों का रंग भी तय कर दिया गया है:
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गुलाबी (Pink): महापौर (Mayor) या अध्यक्ष पद के लिए।
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सफेद (White): वार्ड पार्षद पद के लिए।
विशेष बात यह है कि इस चुनाव में नोटा (NOTA) का विकल्प नहीं दिया गया है, जिसका अर्थ है कि मतदाताओं को मैदान में मौजूद प्रत्याशियों में से ही किसी एक का चुनाव करना अनिवार्य होगा।
कहां-कहां होंगे चुनाव?
झारखंड के 9 नगर निगमों (रांची, धनबाद, देवघर आदि), 20 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों में एक साथ चुनाव होंगे। कुल 1087 वार्डों के लिए 4,304 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव गैर-दलीय आधार पर होंगे, जिससे स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत छवि की भूमिका अहम हो जाएगी।
खर्च की सीमा और सख्त निगरानी
चुनाव में धनबल के प्रभाव को रोकने के लिए आयोग ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 10 लाख से अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में महापौर पद के प्रत्याशी अधिकतम 25 लाख रुपये और वार्ड पार्षद 5 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे। कम आबादी वाले क्षेत्रों के लिए यह सीमा क्रमशः 15 लाख और 3 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
आयुक्त अलका तिवारी ने सख्त लहजे में कहा कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होंगे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और किसी भी प्रकार के कदाचार पर आयोग कड़ी कार्रवाई करेगा। पहचान के लिए मतदाता पहचान पत्र (EPIC) के अलावा 12 अन्य दस्तावेजों को भी मान्य किया गया है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे।



