Bokaro News: कोयलांचल की मिट्टी ने आज अपने एक ऐसे सपूत को अंतिम विदाई दी, जिसने न केवल अलग राज्य की लड़ाई लड़ी, बल्कि शोषितों और वंचितों के हक के लिए ताउम्र संघर्ष किया। झारखंड आंदोलन के प्रखर नेता, सियालजोरी के पूर्व मुखिया सीताराम महतो का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे चंदनकियारी और बोकारो जिले में शोक की लहर दौड़ गई।
शिबू सोरेन और बिनोद बिहारी महतो के थे बेहद करीबी
सीताराम महतो उन गिने-चुने नेताओं में से थे जिन्होंने झारखंड आंदोलन की बुनियाद रखी थी। उन्होंने दिशोम गुरु शिबू सोरेन, स्वर्गीय बिनोद बिहारी महतो और ए.के. राय जैसे दिग्गजों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन को धार दी। महाजनी प्रथा के खिलाफ उनकी लड़ाई आज भी चंदनकियारी के गांवों में किस्सों की तरह सुनाई जाती है। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के पहरेदार थे।
सियालजोरी की आर्थिक तस्वीर बदलने वाले ‘दूरदर्शी’ नेता
सीताराम महतो को उनकी दूरदर्शिता के लिए हमेशा याद किया जाएगा। आज सियालजोरी में जो ‘वेदांता इलेक्ट्रो स्टील प्लांट’ खड़ा है, उसके पीछे महतो जी की ही सोच थी। उन्होंने औद्योगिक विकास के लिए 50 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने में मुख्य भूमिका निभाई, ताकि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिल सके। शिक्षा के प्रति उनका लगाव ऐसा था कि कुड़मी छात्रावास, चास के निर्माण में उन्होंने अपना सर्वस्व लगा दिया।
इजरी नदी के तट पर नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
बुधवार सुबह इजरी नदी के तट पर राजकीय सम्मान जैसी श्रद्धा के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके अंतिम दर्शन के लिए हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। आदिवासी कुड़मी समाज के अजीत महतो, आजसू जिलाध्यक्ष सचिन महतो और कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने उन्हें माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो और पूर्व विधायक आनंद महतो ने उनके निधन को राज्य के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। उनके जाने से चंदनकियारी ने अपना एक मार्गदर्शक और अभिभावक खो दिया है।



