Health Desk: गर्मियों की दस्तक के साथ ही बाजारों में ‘सब्जियों का राजा’ कहा जाने वाला कटहल नजर आने लगा है। स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ कटहल सेहत का एक ऐसा अनमोल खजाना है, जिसे आयुर्वेद में ‘सुपरफूड’ की श्रेणी में रखा गया है। पोषक तत्वों से भरपूर यह सब्जी शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ कई गंभीर बीमारियों से लड़ने में भी मददगार साबित होती है। हालांकि, आयुर्वेद के अनुसार इसे ‘भारी और चिकनाई’ वाली सब्जी माना गया है, इसलिए इसके सेवन का सही तरीका जानना बेहद जरूरी है।
शुगर और दिल के मरीजों के लिए ‘संजीवनी’
डायबिटीज (Sugar) के मरीजों के लिए कटहल एक बेहतरीन विकल्प है। इसका ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ काफी कम होता है, जो रक्त में शर्करा (Blood Sugar) के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। इसके अलावा, दिल की सेहत के लिए भी यह किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें प्रचुर मात्रा में मौजूद पोटेशियम हृदय रोगों के खतरे को कम करता है और खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाने में सहायक होता है।
आंतों की सफाई का ‘नेचुरल ब्रश’
कटहल की सबसे बड़ी खूबी इसमें मौजूद फाइबर की प्रचुरता है। यदि आप लंबे समय से कब्ज या पेट की गंदगी से परेशान हैं, तो कटहल आपके लिए ‘नेचुरल ब्रश’ की तरह काम करता है। यह आंतों में जमा गंदगी को खुरचकर शरीर से बाहर निकाल देता है। सिर्फ सेहत ही नहीं, सौंदर्य के मामले में भी कटहल पीछे नहीं है। इसमें मौजूद विटामिन-A और C का संगम आपकी त्वचा (Skin) में निखार लाता है और बालों को मजबूती प्रदान करता है।
सावधानी भी है जरूरी
आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, चूंकि कटहल पचने में भारी होता है, इसलिए जिनकी ‘पाचन अग्नि’ मंद है (पेट कमजोर है), उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। गैस या एसिडिटी की समस्या वाले लोगों को इसे कम मसालों के साथ और अच्छी तरह पकाकर ही खाना चाहिए। यदि शरीर में वात दोष अधिक है, तो संतुलित मात्रा में ही इसका स्वाद लें ताकि पेट पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
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