World News: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की दहलीज पर खड़ा है। खुफिया रिपोर्टों और कूटनीतिक हलचलों से संकेत मिल रहे हैं कि इजराइल, ईरान के खिलाफ एक और भीषण सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा है। इस संभावित हमले का केंद्र ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और उसके दोबारा सक्रिय हुए परमाणु ठिकाने हैं। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण तारीख 29 दिसंबर है, जब इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आमने-सामने की मुलाकात होने जा रही है।

ट्रंप के साथ बनेगी ‘स्ट्राइक’ की रणनीति; क्या अमेरिका देगा सीधा साथ?

ईरानी अधिकारियों के हवाले से आ रही खबरें चौंकाने वाली हैं। बताया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप खुद ईरान के मिसाइल अभियान को खत्म करने के पक्ष में हैं। 29 दिसंबर की बैठक में नेतन्याहू यह साफ करना चाहेंगे कि ईरान के खिलाफ अगले चरण के अभियान में अमेरिका का सहयोग किस स्तर का होगा। इजराइल को डर है कि ईरान अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता बढ़ा रहा है, जो सीधे इजराइली शहरों को निशाना बना सकती हैं। जून 2025 में हुए पिछले टकराव के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि अब परमाणु ठिकानों पर हमले की सुगबुगाहट ने दुनिया को चिंता में डाल दिया है।

परमाणु ठिकानों की गोपनीयता और IAEA की बेबसी

IAEA (अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) के महानिदेशक राफ़ेल ग्रॉसी ने स्वीकार किया है कि उनके निरीक्षक ईरान के सबसे संवेदनशील ठिकानों तक नहीं पहुँच पा रहे हैं। दूसरी ओर, ईरान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षकों पर अविश्वास जताया है। रूस की खबरों की मानें तो अमेरिका द्वारा जून में किए गए हमलों के बाद हुए नुकसान की भरपाई ईरान ने गुप्त रूप से कर ली है। ईरान का कहना है कि वह अपने वैज्ञानिकों और संयंत्रों की सुरक्षा के लिए आईएईए के साथ सहयोग को सीमित कर चुका है, क्योंकि यह एजेंसी अमेरिकी-इजराइली हमलों को रोकने में विफल रही है।

इतिहास दोहराने की तैयारी: जून 2025 के बाद अब दिसंबर का डर

याद दिला दें कि जून 2025 में दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था। 13 जून को इजराइल ने और 22 जून को अमेरिका ने ईरान के नतांज़ और फोर्डा जैसे परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। अब दिसंबर के आखिरी सप्ताह में नेतन्याहू की ट्रंप से मुलाकात यह तय करेगी कि क्या 2026 की शुरुआत एक नए विश्व युद्ध की आहट के साथ होगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इजराइल इस बार ‘फाइनल स्ट्राइक’ के मूड में है ताकि ईरान की परमाणु क्षमता को दशकों पीछे धकेला जा सके।

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