तेहरान, ईरान | एजेंसी

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच हुए अस्थायी सीजफायर के महज कुछ घंटों बाद कुवैत और सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ठिकानों पर हुए हमलों ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है। कुवैत ने आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि उस पर ईरान और उसके समर्थित गुटों द्वारा सुनियोजित हमला किया गया है, जबकि ईरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘दुश्मन की चाल’ बताया है।

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सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन को भारी नुकसान— सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उनकी प्रमुख ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशन को निशाना बनाया गया है। इस हमले के कारण वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि इससे प्रतिदिन लगभग 7 लाख बैरल तेल की आपूर्ति में कमी आई है। दिलचस्प बात यह है कि ईरान ने सऊदी अरब की पाइपलाइन पर हुए हमले की जिम्मेदारी तो स्वीकार की है, लेकिन कुवैत में हुए विस्फोटों से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया है।

ईरान का पलटवार: इजरायल और अमेरिका पर निशाना— ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक कड़ा बयान जारी कर कहा कि कुवैत पर हमले में उनकी कोई भूमिका नहीं है। ईरानी सेना ने इन हमलों के लिए इजरायल और अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, “यहूदी दुश्मन खाड़ी देशों के बीच गलतफहमी पैदा करके शांति वार्ता को विफल करना चाहते हैं।” ईरान का तर्क है कि यह उन्हें बदनाम करने की एक गहरी कूटनीतिक साजिश है।

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सीजफायर के बाद फिर विस्फोटक हुए हालात— यह तनाव ऐसे समय में चरम पर पहुंचा है जब अमेरिका ने ईरान की कई शर्तें मानते हुए अपनी सेनाएं वापस बुलाने का वादा किया था। लेकिन लेबनान पर हुए भीषण हमलों ने, जिसमें 300 से अधिक लोगों की जान गई, स्थिति को फिर से अनियंत्रित कर दिया है। इन हमलों के बाद ईरान समर्थित गुटों में भारी आक्रोश है।

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अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि कूटनीतिक मेज पर समझौते के बावजूद जमीनी स्तर पर एक-दूसरे पर भरोसा न होना शांति की संभावनाओं को धुंधला कर रहा है। तेल पाइपलाइनों और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया जाना यह संकेत देता है कि मध्य पूर्व में युद्ध के बादल अभी छंटे नहीं हैं।

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