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Ranchi : जमीन और शराब घोटाले समेत आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर मामलों में आरोपित नेक्सजेन ऑटोमोबाइल के मालिक विनय सिंह से भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने मंगलवार को जेल में पूछताछ की। कोर्ट से विधिवत अनुमति प्राप्त करने के बाद एसीबी के अधिकारी लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा, हजारीबाग पहुंचे, जहां विनय सिंह फिलहाल न्यायिक हिरासत में बंद हैं।
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान एसीबी ने विशेष रूप से हजारीबाग में हुए बहुचर्चित वन भूमि घोटाले पर ध्यान केंद्रित किया। यह घोटाला उस समय सामने आया था, जब निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे हजारीबाग के उपायुक्त के पद पर पदस्थापित थे। एसीबी अधिकारियों ने विनय सिंह से उनके और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह के नाम पर की गई भूमि से जुड़ी संदिग्ध खरीद-बिक्री और निवेश को लेकर विस्तार से सवाल किए। इस पूरे मामले की जांच एसीबी की हजारीबाग टीम कर रही है।
पूछताछ के दौरान एसीबी ने निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे और कारोबारी विनय सिंह के बीच हुए कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर जानकारी जुटाने की कोशिश की। अधिकारियों ने बैंक खातों में हुए संदिग्ध ट्रांजैक्शन, करोड़ों रुपये के भुगतान और धन के स्रोत को लेकर सवाल किए। खासतौर पर विनय चौबे की पत्नी स्वप्ना संचिता के खाते में विनय सिंह के माध्यम से किए गए भुगतान को लेकर एसीबी ने कड़ी पूछताछ की।
इसके अलावा, एसीबी ने कारोबारी विनय सिंह से चौबे के कथित काले धन के निवेश से संबंधित जानकारी भी मांगी। अधिकारियों ने यह जानने का प्रयास किया कि विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों के जरिए अवैध धन को कहां और कैसे निवेश किया गया। साथ ही वन भूमि घोटाले की आरोपित और फिलहाल फरार चल रहीं विनय सिंह की पत्नी स्निग्धा सिंह के ठिकाने को लेकर भी पूछताछ की गई, हालांकि इस संबंध में एसीबी को क्या जानकारी मिली, इसका खुलासा नहीं किया गया है।
इधर, झारखंड शराब घोटाले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को जमशेदपुर के वर्तमान उपायुक्त आईएएस कर्ण सत्यार्थी का बयान दर्ज किया गया। एसीबी कोर्ट की अनुमति के बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएस) की धारा 183 (पूर्व में 164) के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष उनका बयान दर्ज हुआ। बयान दर्ज कराने के लिए कोर्ट द्वारा विशेष मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की गई थी।
सूत्रों के अनुसार, कर्ण सत्यार्थी ने अपने बयान में शराब घोटाले से जुड़े कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले तथ्यों का खुलासा किया है। उन्होंने तत्कालीन उत्पाद विभाग के सचिव एवं आईएएस अधिकारी विनय चौबे की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कर्ण सत्यार्थी का बयान दर्ज होने के बाद उसे सीलबंद कर सुरक्षित रख दिया गया है। एसीबी इन बयानों के आधार पर आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुट गई है।

