India News: भारतीय विमानन क्षेत्र में चल रहे संकट की गूँज गुरुवार को संसद के गलियारों में सुनाई दी। लोकसभा में कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद मनीष तिवारी ने देश की सबसे बड़ी एयरलाइन ‘इंडिगो’ (IndiGo) के कुप्रबंधन और एयर इंडिया के अहमदाबाद विमान हादसे की जांच में हो रही देरी को लेकर सरकार पर तीखे हमले बोले। तिवारी ने सदन की कार्यवाही रोककर इन मुद्दों पर तत्काल चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया, जिसने सदन में माहौल को गरमा दिया।

इंडिगो पर आरोप: क्या सरकार को झुकाने की हो रही है कोशिश?

मनीष तिवारी ने लोकसभा सचिवालय को दिए अपने नोटिस में बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इंडिगो एयरलाइंस की उड़ानों में हो रही भारी देरी और उड़ानों का रद्द होना महज कोई तकनीकी समस्या या कुप्रबंधन नहीं है। सांसद का दावा है कि यह “जानबूझकर नियमों की अनदेखी” जैसा मामला लगता है। उन्होंने अंदेशा जताया कि शायद एयरलाइन कंपनियां सरकार पर दबाव बनाकर सुरक्षा मानकों में ढील चाहती हैं। उन्होंने मांग की कि यात्रियों को पूरा रिफंड और उचित मुआवजा मिलना चाहिए, साथ ही भविष्य में ऐसी सार्वजनिक असुविधा को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।

अहमदाबाद विमान हादसा: 6 महीने बाद भी ‘ब्लैक बॉक्स’ की पहेली?

बहस के बीच एयर इंडिया के उस दर्दनाक अहमदाबाद विमान हादसे का मुद्दा भी उठा, जिसमें 250 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया और सदन, दोनों जगह सरकार की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगाए। उन्होंने कहा कि हादसे को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन जनता को अब तक यह नहीं पता कि असली वजह क्या थी। सरकार ने सदन में जानकारी दी कि विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) जून 2025 में बरामद कर लिए गए थे और वे सीसीटीवी निगरानी में सुरक्षित हैं।

सरकारी जवाब और भविष्य की चिंता

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) अंतरराष्ट्रीय मानकों (ICAO) के अनुसार जांच कर रहा है। इसमें विमान निर्माता और पंजीकरण वाले देशों की भी भागीदारी हो सकती है। हालांकि, विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा। मनीष तिवारी ने स्पष्ट किया कि जब तक विमानन क्षेत्र में जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक यात्रियों की सुरक्षा और जनता का भरोसा बहाल करना नामुमकिन है। सदन में हुई इस बहस ने यह साफ कर दिया है कि हवाई यात्रियों की सुरक्षा और एयरलाइंस की मनमानी अब एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है।

Share.
Exit mobile version