Career Desk: दुनियाभर में हेल्थकेयर पेशेवरों की मांग जिस तेजी से बढ़ रही है, उसने मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में नई क्रांति ला दी है। मंदी के दौर में भी अछूते रहने वाले इस सेक्टर में हर साल करोड़ों छात्र एमबीबीएस और बीडीएस जैसे कोर्स के लिए दाखिला लेते हैं। इसी का परिणाम है कि आज भारत दुनिया में सबसे ज्यादा मेडिकल कॉलेजों वाला देश बन गया है।

10 सालों में बदली तस्वीर

आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2014 से पहले भारत में महज 387 मेडिकल कॉलेज थे। 2024 तक यह संख्या 102 फीसदी की भारी बढ़त के साथ 780 तक पहुंच गई है। भारत सरकार द्वारा मेडिकल एजुकेशन पर दिए जा रहे विशेष ध्यान की वजह से आज सरकारी और निजी, दोनों क्षेत्रों में कॉलेजों का जाल बिछा है।

सीटों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि

सिर्फ कॉलेज ही नहीं, बल्कि सीटों के मामले में भी भारत ने लंबी छलांग लगाई है। 2014 से पहले जहां एमबीबीएस की केवल 51,348 सीटें थीं, वहीं अब यह 130 फीसदी बढ़कर 1,18,137 हो गई हैं। अगर इसमें पोस्टग्रेजुएट (MD/MS) की 64,059 सीटों को जोड़ दिया जाए, तो यह आंकड़ा और भी प्रभावशाली हो जाता है।

किस राज्य का है दबदबा?

मेडिकल शिक्षा के मामले में तमिलनाडु देश में सबसे आगे है, जहां 74 कॉलेजों में 11,000 से अधिक सीटें उपलब्ध हैं। इसके बाद कर्नाटक 70 कॉलेजों (11,745 सीटें) और उत्तर प्रदेश 68 कॉलेजों (9,000 से अधिक सीटें) के साथ अग्रणी राज्यों में शामिल हैं।

वैश्विक तुलना: चीन और अमेरिका से आगे भारत

कॉलेजों की संख्या के मामले में भारत ने चीन और अमेरिका जैसे विकसित देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। चीन में लगभग 420 मेडिकल संस्थान हैं, हालांकि वहां बड़ी आबादी के कारण हर साल करीब 4 लाख डॉक्टर तैयार होते हैं। वहीं, अमेरिका में महज 171 मेडिकल स्कूल हैं, जहां से सालाना 20 से 25 हजार डॉक्टर निकलते हैं। भारत की यह प्रगति भविष्य में वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ी भूमिका निभाने का संकेत दे रही है।

Share.
Exit mobile version