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Mumbai: बुधवार की सुबह महाराष्ट्र के लिए एक ऐसी काल बनकर आई, जिसने पूरे राज्य को गहरे शोक में डुबो दिया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की एक दर्दनाक विमान हादसे में मौत हो गई है। जानकारी के अनुसार, अजित पवार का चार्टर प्लेन बुधवार सुबह दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी मौत की खबर फैलते ही समूचे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। विशेष रूप से उनके गृह क्षेत्र बारामती में सन्नाटा पसरा है और उनके समर्थक भारी संख्या में वहां पहुंच रहे हैं।
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यह हादसा हमें उन जख्मों की याद दिलाता है, जो समय-समय पर विमान दुर्घटनाओं ने भारतीय राजनीति को दिए हैं। अजित पवार से पहले भी देश ने कई ऐसे ही लोकप्रिय और दूरदर्शी नेताओं को विमान में खोया है।
इतिहास के वे काले पन्ने: जब विमान हादसों ने बदला भारत
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संजय गांधी (1980): 23 जून 1980 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले संजय गांधी की दिल्ली में विमान हादसे में मौत हो गई थी। वे स्वयं विमान उड़ा रहे थे।
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माधवराव सिंधिया (2001): कांग्रेस के दिग्गज नेता माधवराव सिंधिया का विमान 30 सितंबर 2001 को यूपी के मैनपुरी में क्रैश हो गया था। इस हादसे ने देश से एक बेहद सौम्य राजनेता को छीन लिया था।
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जी.एम.सी. बालयोगी (2002): तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष बालयोगी की मौत भी 2002 में हेलीकॉप्टर हादसे में हुई थी, जिसे लोकतंत्र के लिए बड़ी क्षति माना गया।
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वाई.एस. राजशेखर रेड्डी (2009): आंध्र प्रदेश के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्रियों में से एक वाईएसआर का हेलीकॉप्टर 2009 में नल्लमाला के जंगलों में क्रैश हुआ था, जिससे पूरा दक्षिण भारत शोक में डूब गया था।
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सीडीएस बिपिन रावत (2021): भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत का तमिलनाडु के कुन्नूर में हेलीकॉप्टर हादसा सैन्य इतिहास का सबसे काला दिन माना जाता है।
अन्य राजनीतिक हस्तियां और हादसे
इसके अलावा भी कई केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और वरिष्ठ नेता हवाई दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा चुके हैं। खासतौर पर वीआईपी मूवमेंट के दौरान खराब मौसम, तकनीकी खराबी और मानवीय भूलें इन हादसों की प्रमुख वजह रही हैं।
सुरक्षा पर उठते सवाल
हर बड़े हादसे के बाद सरकार जांच के आदेश देती है, रिपोर्ट आती है, लेकिन सवाल वही रहते हैं-
- क्या वीआईपी उड़ानों के लिए पर्याप्त सुरक्षा मानक हैं?
- क्या मौसम की चेतावनियों को गंभीरता से लिया जाता है?
- क्या पायलट और तकनीकी स्टाफ पर दबाव में उड़ान भरने का दबाव रहता है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में वीआईपी हेलीकॉप्टर उड़ानों के लिए और सख्त नियम, आधुनिक तकनीक और पारदर्शी जांच प्रणाली की जरूरत है।
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