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गुमला। रविवार को गुमला शहर में चेहल्लुम का पर्व पूरे जोश और उल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर हजारों की संख्या में लोग विशाल जुलूस में शामिल हुए। खास बात यह रही कि पूरे कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों और नारों की गूंज सुनाई दी तथा हर जगह साम्प्रदायिक सौहार्द और भाईचारे का अद्भुत नज़ारा देखने को मिला।
दोपहर करीब 4 बजे शुरू हुआ जुलूस आजाद बस्ती से निकलकर इस्लामपुर, हुसैन नगर, बाबर गली, थाना रोड, आंबेडकर नगर, खड़िया पाड़ा, चांदनी चौक, बाजारटांड़, सिसई रोड, टावर चौक होते हुए गांधी नगर मोड़ तक पहुँचा। इसके बाद लोहरदगा रोड, महावीर चौक और मेन रोड से होकर देर रात टावर चौक पर इसका समापन हुआ।
करीब 12 अखाड़ों के सदस्यों ने जुलूस में हिस्सा लिया। युवाओं ने तलवार, भाला और लाठी के साथ रोमांचक करतब दिखाए। अलग-अलग स्थानों पर आकर्षक प्रदर्शन होते ही भीड़ उत्साह से झूम उठी। पारंपरिक पोशाक में सजे युवाओं ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया। ताजिया इस जुलूस का मुख्य आकर्षण रहा। विभिन्न मोहल्लों से निकले ताजियों में भी देशभक्ति की झलक साफ दिखाई दी।
प्रशासन और समाज के प्रतिनिधि भी रहे मौजूद
कार्यक्रम के दौरान पगड़ीपोशी समारोह आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर एसपी हारिश बिन जमा, एसडीपीओ सुरेश प्रसाद यादव और थाना प्रभारी महेंद्र करमाली शामिल हुए। साथ ही अंजुमन इस्लामिया गुमला के पदाधिकारी, नगर परिषद के प्रतिनिधि, पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
“ऐतिहासिक जुलूस” — अंजुमन इस्लामिया
अंजुमन इस्लामिया गुमला के पदाधिकारियों ने कहा कि मुहर्रम सेंट्रल कमेटी के नेतृत्व में निकाला गया यह चेहल्लुम जुलूस अपने आप में ऐतिहासिक रहा। उन्होंने बताया कि हुसैन की याद में निकाले गए इस आयोजन ने गुमला में एकता, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव की मिसाल कायम की।
एसपी ने दिया शांति का संदेश
एसपी हारिश बिन जमा ने कहा कि हर धर्म की मूल शिक्षा आपसी मोहब्बत और भाईचारे पर आधारित है। गुमला जिला हमेशा से अमन और शांति का प्रतीक रहा है और यहां से पूरे राज्य में सद्भाव का संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि मुहर्रम और चेहल्लुम की परंपरा हमें कर्बला की कुर्बानी की याद दिलाती है, जो सिखाती है कि सच्चाई हमेशा अन्याय और बुराई पर विजय पाती है।


