India News: मकर संक्रांति के पावन पर्व पर धर्मनगरी हरिद्वार आज पूरी तरह से भक्ति के रंग में सराबोर नजर आई। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चादर भी श्रद्धालुओं के कदमों को रोक नहीं पाई। गुरुवार सुबह तड़के से ही ब्रह्मकुंड और हर की पौड़ी के अन्य घाटों पर हजारों की संख्या में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोग कड़कड़ाती ठंड की परवाह किए बिना पतित-पावन गंगा की लहरों में डुबकी लगाकर पुण्य कमाने में जुटे रहे।
हर-हर गंगे के जयघोष से गूंजी धर्मनगरी
जैसे ही सूरज की पहली किरण कोहरे के बीच से झांकी, हर की पौड़ी का नजारा देखने लायक था। कोई अपने परिवार के साथ पूजा-पाठ कर रहा था, तो कोई दान-पुण्य के जरिए इस दिन को खास बना रहा था। पटना के मनेर से आए श्रद्धालु कन्हैया ने बताया कि हमारे ऋषि-मुनि कह गए हैं कि हर तीर्थ यात्रा जीवन में एक बार जरूर करनी चाहिए, इसलिए वे अपने पूर्वजों की परंपरा को निभाने यहां आए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने घाटों को आकर्षक ढंग से सजाया है और यातायात की विशेष व्यवस्था की है।
गंगासागर से लेकर पटना तक उत्सव का माहौल
स्नान का यह उत्सव केवल हरिद्वार तक ही सीमित नहीं रहा। पश्चिम बंगाल के गंगासागर में भी लाखों श्रद्धालुओं ने ‘सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार’ की कहावत को चरितार्थ करते हुए पवित्र डुबकी लगाई। पहली बार गंगासागर पहुंचे राजकुमार ठाकुर ने बताया कि यहां की दिव्य ऊर्जा मन को हल्का और प्रसन्न कर देने वाली है। उधर, बिहार और उत्तर प्रदेश के विभिन्न घाटों पर भी लोग गंगा स्नान के बाद दही-चूड़ा और खिचड़ी का आनंद लेते नजर आए।
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सुरक्षा के लिहाज से चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। बैरिकेडिंग के जरिए भीड़ को नियंत्रित किया गया ताकि बुजुर्गों और बच्चों को स्नान के दौरान कोई परेशानी न हो। ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष के साथ हरिद्वार का कोना-कोना आज अध्यात्म की रोशनी से जगमगा उठा।



