India News: अगर आपकी ट्रेन बीच रास्ते में रुक जाती है, तो इसका कारण आपकी एक छोटी सी लापरवाही भी हो सकती है। भारतीय रेलवे की ताजा जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यात्रियों द्वारा सफर के दौरान फेंके गए गुटका और चिप्स के पाउच कई बार रेलवे सिग्नल में फंस जाते हैं, जिससे सिग्नल फेल हो जाता है और ट्रेन को रोकना पड़ता है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि देशभर में लगभग 70,000 किलोमीटर लंबा ट्रैक नेटवर्क और करीब 23,000 ट्रेनें (पैसेंजर व गुड्स) रोजाना चलती हैं। इनमें से 13,000 से अधिक यात्री ट्रेनें हैं, जिनमें 4,000 प्रीमियम ट्रेनें (वंदे भारत, शताब्दी, राजधानी जैसी) शामिल हैं। हाल ही में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रैक निरीक्षण के दौरान पाया कि सबसे ज्यादा कचरा गुटका पाउच और चिप्स के रैपर के रूप में मिला।
ऐसे रुक जाती है ट्रेन
रेलवे मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यात्री सफर के दौरान गुटका पाउच खोलने के बाद उसे खिड़की से बाहर फेंक देते हैं। ये पाउच ट्रैक पर गिरकर हवा के साथ उड़ते हुए रेल सिग्नल बॉक्स या सिग्नल सेंसर में फंस जाते हैं। इससे सिग्नल काम करना बंद कर देता है और सुरक्षा मैनुअल के अनुसार ट्रेन उस स्थान पर रोक दी जाती है।
जब सिग्नल बंद हो जाता है, तो लोको पायलट संबंधित स्टेशन मास्टर को सूचना देता है। स्टेशन मास्टर या गेटमैन मौके पर जाकर सिग्नल बॉक्स की सफाई करता है और पाउच हटाने के बाद सिग्नल दोबारा काम करने लगता है। यह प्रक्रिया ट्रेन संचालन में लंबी देरी का कारण बनती है।
रेलवे ने जताई चिंता
रेलवे अधिकारियों ने कहा कि यात्रियों की ये छोटी‑छोटी हरकतें बड़े पैमाने पर ऑपरेशनल परेशानी पैदा कर रही हैं। पाउच और प्लास्टिक कचरे से न केवल सिग्नल बल्कि पटरियों के पास लगे अन्य उपकरणों को भी नुकसान पहुंच रहा है। रेलवे ने सभी ज़ोन को निर्देश दिया है कि स्टेशनों और ट्रेनों में स्वच्छता पर और सख्त निगरानी रखी जाए।



