Geneva News : जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में 14 से 18 जुलाई 2025 के बीच आयोजित विशेषज्ञ तंत्र (EMRIP) के 18वें सत्र में भारत के झारखंड से संबंध रखने वाले आदिवासी प्रतिनिधि गुंजल इकिर मुंडा ने एशिया के आदिवासी समुदायों की ओर से ऐतिहासिक बयान दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र आदिवासी अधिकार घोषणा-पत्र (UNDRIP) के प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर देते हुए आदिवासी पारंपरिक अर्थव्यवस्थाओं, शिक्षा, सांस्कृतिक अधिकारों और डेटा स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों को उठाया।
मुंडा ने डेटा अधिकारों पर भी अहम विचार रखे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि आदिवासी समुदायों को अपनी सांस्कृतिक दृष्टिकोणों और आवश्यकताओं के अनुसार डेटा संग्रह, विश्लेषण और उपयोग के लिए सशक्त किया जाए। उनका मानना है कि आदिवासी समाज को तकनीकी और सामाजिक रूप से सशक्त बनाकर ही उन्हें सच्चे अर्थों में समानता और न्याय मिल सकता है।
इसके अलावा, उन्होंने ज़मीन अधिग्रहण और जबरन विस्थापन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी चिंता जताई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से सरकारों से आग्रह किया कि वे ऐसे क़ानून लागू करें जो आदिवासियों की भूमि और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
गुंजल इकिर मुंडा का यह संबोधन न सिर्फ भारत, बल्कि पूरे एशिया के आदिवासी समुदायों की आवाज बनकर उभरा है। उनके विचारों ने यह साफ किया कि जब तक पारंपरिक ज्ञान, शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान को मुख्यधारा में स्थान नहीं दिया जाएगा, तब तक आदिवासी अधिकारों की रक्षा अधूरी रहेगी।



