गुमला/डुमरी :- जिले में संचालित “प्रोजेक्ट द्वार” अभियान के तहत गुमला उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने डुमरी प्रखंड के दुर्गम PVTG गांव असुरटोली व लातापानी (करमदोन) का दौरा किया। यह दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक रहा, क्योंकि पहली बार कोई उपायुक्त इस दूरस्थ असुर एवं कोरवा जनजाति बहुल गांव तक पहुंची थीं। उपायुक्त के पहुंचते ही गांव में उत्साह, भरोसा और लंबे समय से चली आ रही उम्मीदों की रोशनी साफ दिखी।
असुरटोली में आदिम जनजाति ‘असुर’ के 10 परिवार और लातापानी में ‘कोरवा’ समुदाय के 13 परिवार रहते हैं। दोनों गांव वर्षों से बुनियादी सुविधाओं की कमी, टूटी टंकियों, सड़क अभाव और स्वास्थ्य सेवाओं के संकट से जूझते रहे हैं। मुखिया ज्योति बहेर देवी ने उपायुक्त का स्वागत करते हुए कहा कि गांव के लिए यह ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि कभी कोई शीर्ष अधिकारी यहां नहीं पहुंचा। उन्होंने सड़क, पानी और महिलाओं की आजीविका से जुड़ी बड़ी मांगें रखीं।
उपायुक्त ने ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि वे जमीनी समस्याएं समझने और उनका तत्काल समाधान सुनिश्चित करने आई हैं। उन्होंने PHED को फटी पानी की टंकी अगले दिन ही दुरुस्त कराने का निर्देश दिया। REO के अभियंता को सड़क का अलाइनमेंट तैयार कर प्रस्ताव भेजने को कहा गया। महिलाओं को आजीविका से जोड़ने के लिए मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण प्रारंभ करने का निर्देश भी दिया गया।
सर्वे के आधार पर योजनाओं का लाभ मौके पर ही दिया गया। असुरटोली में 4 राशन कार्ड, 5 आधार कार्ड, 7 जन्म प्रमाण पत्र, 5 पेंशन प्रमाण पत्र, 3 लाभुकों को किशोरी समृद्धि योजना, 2 को मातृ वंदना योजना, 2 आवासीय प्रमाण पत्र, 5 जाति प्रमाण पत्र एवं 11 लाभुकों को आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराए गए। इसके साथ ही 24 परिवारों के बीच कंबल और 24 परिवारों को मच्छरदानी का वितरण किया गया।
उपायुक्त ने कुपोषण पर गंभीर चिंता जताते हुए सहजन (मुनगा) के पौधे स्वयं लगाकर इसके पोषण संबंधी लाभ बताए। उन्होंने कहा कि जिले में कोई बच्चा कुपोषित न रहे, यह प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
ग्रामीणों ने ओहखड़गढ़ा से लातापानी होते हुए छत्तीसगढ़ सीमा तक 4 किमी सड़क निर्माण की भी मांग की, जिस पर उपायुक्त ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
दौरे में SDO चैनपुर, DCLR चैनपुर, सिविल सर्जन एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।



