रांची: झारखंड की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं में पिछले कई वर्षों से खाली पड़े पदों को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में इस मामले की अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि लोकायुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है और अगले एक सप्ताह के भीतर इसकी अनुशंसा राज्यपाल को भेज दी जाएगी।
सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर ‘पेंच’ बरकरार
लोकायुक्त के अलावा मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति का मुद्दा भी अदालत में गूंजा। राज्य सरकार ने खंडपीठ को जानकारी दी कि कुछ संभावित नामों की सूची पहले ही राजभवन भेजी जा चुकी है। हालांकि, राज्यपाल द्वारा कुछ विशिष्ट नामों पर आपत्ति जताई गई है। सरकार फिलहाल उन बिंदुओं पर विचार कर रही है और कानूनी पहलुओं को खंगाल रही है ताकि जल्द से जल्द सूचना आयोग को पुनर्जीवित किया जा सके।
सालों से खाली पदों ने बढ़ाई चिंता
यह सुनवाई राजकुमार द्वारा दायर अवमानना याचिका और एक अन्य जनहित याचिका पर हो रही थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि राज्य में लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सूचना आयुक्त जैसे अहम पद पिछले 3 से 5 वर्षों से रिक्त पड़े हैं। इन संस्थाओं में नेतृत्व न होने के कारण जनता से जुड़ी शिकायतों का निपटारा नहीं हो पा रहा है और कामकाज पूरी तरह से ठप है।
अदालत की अगली तारीख 23 अप्रैल
राज्य सरकार के आश्वासनों को दर्ज करते हुए अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल तय की है। पिछली सुनवाई में भी सरकार ने जल्द नियुक्तियां करने का वादा किया था, लेकिन इस बार समय सीमा (एक सप्ताह) की बात कहकर सरकार ने अपनी गंभीरता दिखाई है। अब सबकी नजरें 23 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं कि क्या तब तक राज्य को नया लोकायुक्त और सूचना आयुक्त मिल पाता है या नहीं।



