Bihar News: फारबिसगंज में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। परमान नदी पर करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया पुल अचानक धंस गया। ये वही पुल है जिसे एनडीए नेताओं ने बड़ी उपलब्धि बताया था और अब लोग सवाल पूछ रहे हैं- “पैसा गया कहाँ?” और “सुरक्षा पर किसने ध्यान दिया?”

ये पुल कविलासा गांव में है, जो बीजेपी सांसद प्रदीप कुमार सिंह का गांव भी है। ऐसे में घटना ने सिर्फ विकास के दावे को नहीं, बल्कि पूरी राजनीति को हिला दिया है।

5 सदस्यीय हाई-लेवल जांच टीम गठित

मामला सामने आते ही ग्रामीण कार्य विभाग हरकत में आया। विभाग ने 5 सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है, जिसमें अभियंता, स्टेट क्वालिटी कोऑर्डिनेटर, तकनीकी विशेषज्ञ, पुल सलाहकार और IIT पटना के प्रोफेसर वैभव सिंघल शामिल हैं। इस टीम को सिर्फ 3 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश है।

4 करोड़ की मंजूरी, 3.82 करोड़ में बना पुल, फिर भी धंस गया

पुल की कुल लंबाई 129.02 मीटर है।
मंजूर बजट- ₹4.12 करोड़
टेंडर में काम मिला- ₹3.82 करोड़
निर्माण पूरा- मार्च 2021

यानी अभी सिर्फ चार साल भी नहीं हुए और पुल बैठ गया। स्थानीय लोगों का कहना है, “पुल शुरू से ही कमजोर लग रहा था। बारिश और नदी के बहाव से ये हालत हुई।”

टेक्निकल टीम ने पहले ही दिया था चेतावनी अलर्ट

24 अक्टूबर को तकनीकी सलाहकार रमेश कुमार ने पुल निरीक्षण के दौरान पाया कि उसका पाया धीरे-धीरे नीचे जा रहा है।
उन्होंने तत्काल पुल को बंद करने की सलाह दी। फिलहाल पुल डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड में है, यानी निर्माण एजेंसी अभी ज़िम्मेदार है।

बिहार में पुलों की हालत पर बड़ा सवाल

यह पहली बार नहीं है। इससे पहले-
• सिकटी में 12 करोड़ का पुल उद्घाटन से पहले ढह गया था
• रानीगंज में खेत के बीच पुल बनाया गया, सड़क ही नहीं थी

ऐसे में लोग पूछ रहे हैं- “पुल बनते ही गिर रहे हैं, तो निरीक्षण कौन करता है?”

अब लोग जवाब चाहते हैं

सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे- “बिहार में पुलों की आयु सड़क चाय की दुकान से भी कम क्यों है?” इस केस की रिपोर्ट आने तक सवालों का तूफान रुकने वाला नहीं।

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