India News: उत्तर भारत में हर साल सर्दियों के मौसम में घने कोहरे का असर केवल सड़क यातायात पर ही नहीं पड़ता, बल्कि भारतीय रेल संचालन भी गंभीर रूप से प्रभावित होता है। विजिबिलिटी (दृश्यता) कम होने के चलते ट्रेनों की रफ्तार बेहद धीमी पड़ जाती है, और सुरक्षा कारणों से कई ट्रेनों को अस्थायी रूप से रद्द करना पड़ता है। इसी कड़ी में भारतीय रेलवे ने 1 दिसंबर 2025 से 1 मार्च 2026 तक उत्तर भारत में चलने वाली कई ट्रेनों को रद्द करने का फैसला लिया है।

यात्रियों को होने वाली असुविधा के बीच, सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर किन वैज्ञानिक और परिचालन मानकों के आधार पर ट्रेनें कैंसिल की जाती हैं, और रद्द होने वाली ट्रेनें कौन सी होती हैं?

ऑक्युपेंसी रेट है सबसे बड़ा मानक

एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने बताया कि ट्रेनों को रद्द करने की प्रक्रिया एक व्यवस्थित अध्ययन और डेटा एनालिसिस के बाद तय की जाती है। सबसे महत्वपूर्ण मानक ऑक्युपेंसी रेट (यात्री संख्या) होता है।

रेलवे यह सुनिश्चित करता है कि ऐसी ट्रेनें बंद न हों, जिनमें रोजाना बड़ी संख्या में लोग सफर करते हैं। इसलिए वे ट्रेनें चुनकर रद्द की जाती हैं, जिनमें यात्री कम होते हैं, ताकि अधिक लोगों को परेशानी न हो। रेलवे का प्राथमिक उद्देश्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि रद्द होने वाली ट्रेनों से यात्रियों को न्यूनतम असुविधा हो।

AI आधारित डेटा एनालिसिस और स्पेशल ट्रेनों पर फोकस

रेल मंत्रालय के अनुसार, कोहरे के दौरान मुख्य रूप से स्पेशल ट्रेनें ही रद्द की जाती हैं। ये वे ट्रेनें होती हैं जिन्हें भीड़ बढ़ने पर अतिरिक्त सुविधा के रूप में चलाया जाता है और ये नियमित (रेगुलर) सेवाओं की श्रेणी में नहीं आती हैं। इसीलिए किसी विशेष परिस्थिति में सबसे पहले इन्हें ही अस्थायी रूप से रोका जाता है, जिससे नियमित रेल सेवाओं पर असर न पड़े।

हालांकि, यह जरूरी नहीं कि सभी स्पेशल ट्रेनों को ही रद्द किया जाए। रेलवे इसके लिए एआई आधारित डेटा एनालिसिस का उपयोग करता है। इस अध्ययन से पता लगाया जाता है कि कौन सी ट्रेनें कम भीड़ के साथ चल रही हैं और कौन सी ट्रेनें कोहरा प्रभावित इलाकों में चलती हैं। केवल वही ट्रेनें अस्थायी रूप से रोकी जाती हैं, जिन्हें रद्द करने से यात्रियों को न्यूनतम असुविधा होगी।

रेलवे के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, रद्द होने वाली ट्रेनों के यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी तैयार की जाती हैं, ताकि वे अन्य नियमित या उपलब्ध ट्रेनों से अपना सफर पूरा कर सकें। कुल मिलाकर, घने कोहरे में रेलवे का प्राथमिक उद्देश्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है, और ट्रेनों को रद्द करने का फैसला पूरी तरह डेटा, यात्रियों की जरूरतों और सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही किया जाता है।

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