Jharkhand News: झारखंड के बोकारो जिले में स्थित तेतुलिया मौजा की 100 एकड़ से ज्यादा वन भूमि की कथित फर्जी खरीद-बिक्री मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच तेज कर दी है। बुधवार को ED की टीम रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार पहुंची, जहां इस मामले में मुख्य आरोपित इज़हार हुसैन और अख्तर हुसैन से लंबी पूछताछ की गई।

सूत्रों के अनुसार, दोनों आरोपितों से पूछताछ के दौरान जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े कई अहम दस्तावेजों के बारे में जानकारी ली गई। ED ने विशेष रूप से इस बात की जांच की कि 1933 का जो नीलामी पत्र पेश किया गया था, वह किसने और कैसे बनवाया। लेकिन इज़हार और अख्तर इस सवाल पर चुप्पी साधे रहे।

जांच में सामने आया है कि साल 2012 में इज़हार और अख्तर हुसैन के नाम पर अवैध तरीके से इस जमीन की जमाबंदी करा दी गई थी। हालांकि, 2016 में बोकारो डीसी ने यह जमाबंदी रद्द कर दी। लेकिन 2018 में हाईकोर्ट ने इस रद्दीकरण पर रोक लगाते हुए संबंधित पक्षों को टाइटल सूट दायर करने का निर्देश दिया। इस बीच, आरोपितों ने कथित साजिश के तहत इस जमीन को प्रतिबंधित सूची से हटवाकर इसे सामान्य भूमि की श्रेणी में दिखा दिया।

इसके बाद एक फर्जी दस्तावेज – 1933 का नीलामी पत्र – तैयार कर जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी शैलेश सिंह को दे दी गई। खास बात यह है कि शैलेश सिंह ने इस जमीन को उमायुष मल्टीकॉम नामक कंपनी को बेच दिया, जिसमें उनकी पत्नी निदेशक हैं। यानी इस पूरे लेन-देन की योजना परिवार के भीतर ही बनाई गई थी।

ED की जांच में यह भी सामने आया है कि इस प्रक्रिया में सरकारी विभाग के फर्जी एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) का उपयोग किया गया था, ताकि यह दिखाया जा सके कि जमीन की बिक्री वैध है। इतना ही नहीं, इज़हार अंसारी द्वारा जमीन पर लगभग 10.23 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था, जिसकी वैधता पर भी अब सवाल उठने लगे हैं।

इस पूरे मामले की गहराई को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने पीएमएलए कोर्ट से इज़हार और अख्तर से जेल में पूछताछ की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने एक दिन के लिए यह अनुमति प्रदान की, जिसके बाद ED की टीम ने जेल जाकर आरोपितों से कड़ाई से सवाल पूछे। लेकिन अधिकतर सवालों के जवाब टालने की कोशिश की गई।

गौरतलब है कि 12 जुलाई को झारखंड सीआED ने इज़हार और अख्तर हुसैन को इस मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला अब केवल जमीन घोटाले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी दस्तावेजों की फर्जीवाड़े की भी बड़ी परतें उजागर हो रही हैं।

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