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Ranchi : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शिक्षा जगत के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। सदन ने झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 पारित कर दिया है। इसके तहत अब विश्वविद्यालयों में कुलपति, प्रतिकुलपति, रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक जैसे पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होगा। साथ ही, लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करते हुए झारखंड राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन का भी निर्णय लिया गया।
झारखंड यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (JUTAN) के अध्यक्ष प्रो. जगदीश लोहरा ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि वर्षों से विश्वविद्यालयों में उच्च पदों पर राजनीतिक और वैचारिक पृष्ठभूमि के आधार पर नियुक्तियाँ होती रही हैं, जिसके कारण शैक्षणिक माहौल प्रभावित हुआ है। कई पूर्व कुलपतियों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे और विश्वविद्यालयों में परीक्षा संचालन व परिणामों में देरी जैसी अव्यवस्थाएँ हावी रही हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि बिना तैयारी के राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू करना एक बड़ी भूल रही है। अब उम्मीद है कि सरकार के इस निर्णय से झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा और शिक्षाविदों को बेहतर अवसर मिलेंगे।
राज्य के विश्वविद्यालयों में फिलहाल लगभग 4500 शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जिनमें कॉलेज प्राचार्य, असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर भी शामिल हैं। प्रो. लोहरा ने कहा कि जब तक नया आयोग पूरी तरह से कार्यशील नहीं होता, तब तक जेपीएससी (JPSC) के माध्यम से JET परीक्षा आयोजित कर भर्ती प्रक्रिया तुरंत शुरू करनी चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि झारखंड उच्च शिक्षा में नामांकन अनुपात राष्ट्रीय औसत से 10% पीछे है, जिस पर गंभीर प्रयास की आवश्यकता है।

