रांची: झारखंड की राजनीति के दिग्गज और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सोमवार को रांची की एमपी/एमएलए विशेष अदालत में एक पुराने और गंभीर आपराधिक मामले को लेकर गहमागहमी तेज रही। विशेष न्यायाधीश सार्थक शर्मा की अदालत में बंधु तिर्की समेत कुल सात आरोपियों के बयान सीआरपीसी की धारा 313 के तहत दर्ज किए गए। अदालत के कटघरे में खड़े होकर सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

क्या है 7 साल पुराना वो ‘खूनी’ विवाद

यह पूरा मामला 1 नवंबर 2017 का है, जब झारखंड राज्य काउंसिल (भारत स्काउट्स और गाइड्स) के चुनाव चल रहे थे। आरोप है कि चुनाव में धांधली की जांच के दौरान शिकायतकर्ता नरेश कुमार को बैठक में शामिल होने से बलपूर्वक रोका गया। जांच प्रक्रिया के लिए नरेश कुमार की उपस्थिति अनिवार्य थी, लेकिन उन्हें अंदर जाने देने के बजाय उनके साथ हिंसक व्यवहार किया गया।

मारपीट से लेकर चेन छिनतई तक

शिकायतकर्ता का दावा है कि उन पर न केवल जानलेवा हमला किया गया, बल्कि लोहे की रॉड से बेरहमी से पिटाई भी की गई। प्राथमिकी (FIR संख्या 298/2017) के मुताबिक, बंधु तिर्की के तीन अंगरक्षकों रामदेव प्रसाद, विशाल उरांव और सीनू राम जोंको ने नरेश कुमार का कॉलर पकड़ा और उनकी कनपटी पर कट्टा सटाकर जान से मारने की धमकी दी। इतना ही नहीं, उन पर गाली-गलौज करने और गले से सोने की चेन छीनने जैसे संगीन आरोप भी लगाए गए हैं।

अदालत में क्या हुआ

सोमवार की कार्यवाही के दौरान सभी सात आरोपियों ने अदालत के सामने अपनी बात रखी। धारा 313 के तहत जब न्यायाधीश ने उनसे घटना से जुड़े सवाल पूछे, तो सभी ने एक सुर में कहा कि वे निर्दोष हैं और उन्हें इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। अब इस मामले में गवाही का दौर लगभग समाप्त हो चुका है और अगली सुनवाई में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच जोरदार बहस होगी।

झारखंड की सियासत में अपनी पकड़ रखने वाले बंधु तिर्की के लिए यह फैसला काफी अहम होने वाला है। क्या अदालत इन दलीलों से संतुष्ट होगी या पूर्व मंत्री की मुश्किलें और बढ़ेंगी? सबकी निगाहें अब अगली सुनवाई और अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

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