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Home»Adda More..»समय से पहले ‘जवान’ होना खतरे की घंटी! किशोरों में घट रही सीखने की शक्ति
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समय से पहले ‘जवान’ होना खतरे की घंटी! किशोरों में घट रही सीखने की शक्ति

क्या आपका बच्चा समय से पहले बड़ा हो रहा है? शोध में खुलासा हुआ है कि प्यूबर्टी हॉर्मोन मस्तिष्क के फ्रंटल कॉर्टेक्स को प्रभावित कर सीखने की क्षमता कम कर रहे हैं। पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।
एडिटरBy एडिटरJanuary 24, 20262 Mins Read
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Health: आज के दौर में खान-पान में बढ़ती मिलावट और रसायनों का इस्तेमाल न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बिगाड़ रहा है, बल्कि बच्चों के मानसिक विकास पर भी गहरा आघात कर रहा है। हाल ही में हुए एक ताजा अध्ययन ने अभिभावकों और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। शोध के अनुसार, जो बच्चे समय से पहले युवावस्था (प्यूबर्टी) की दहलीज पर कदम रख रहे हैं, उनमें सीखने और समझने की क्षमता तेजी से घट रही है।

मस्तिष्क के ‘कंट्रोल रूम’ पर हॉर्मोन का हमला

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि प्यूबर्टी के दौरान निकलने वाले हॉर्मोन मस्तिष्क के फ्रंटल कॉर्टेक्स को सीधे प्रभावित करते हैं। फ्रंटल कॉर्टेक्स मस्तिष्क का वह हिस्सा है जो सीखने, ध्यान केंद्रित करने और स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होता है। अध्ययन की मुख्य लेखक लिंडा विलब्रेख्त के अनुसार, ये हॉर्मोन मस्तिष्क के तंत्रिका संचार (Neural Communication) में बाधा पैदा करते हैं, जिससे बच्चों की एकाग्रता भंग होती है।

तनाव और मोटापा भी हैं बड़े कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक शहरी परिवेश में लड़कियां तनाव और मोटापे के कारण समय से पहले बड़ी हो रही हैं। यह न केवल उनके शारीरिक विकास को प्रभावित कर रहा है, बल्कि स्कूलों में उनके खराब प्रदर्शन और गिरते मानसिक स्वास्थ्य का भी बड़ा कारण बन रहा है। मिलावटी भोजन में मौजूद रसायन शरीर में हॉर्मोनल असंतुलन पैदा कर रहे हैं, जिससे प्राकृतिक विकास का चक्र समय से पहले ही सक्रिय हो जाता है।

पहली बार दिखा हॉर्मोन और न्यूरॉन्स का संबंध

जानवरों पर किए गए प्रयोगों में जब प्यूबर्टी हॉर्मोन इंजेक्ट किए गए, तो उनके मस्तिष्क के फ्रंटल हिस्से में महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह अपनी तरह का पहला अध्ययन है, जो प्रमाणित करता है कि यौवन से संबंधित हॉर्मोन सीधे तौर पर कॉर्टेक्स के तंत्रिका संचार को बदल देते हैं। यह शोध इस बात की ओर इशारा करता है कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उनके खान-पान और जीवनशैली पर ध्यान देना अब हां की तरह अनिवार्य हो गया है, ताकि उनका मानसिक विकास प्रभावित न हो।

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