India News: भारतीय सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि देश की प्राकृतिक सुरक्षा तैयारियों को आधुनिक युग की जरूरतों के साथ तालमेल में लाने के लिए त्रि‑सेवा समन्वय, संयुक्तता और थिएटराइजेशन मॉडल बेहद आवश्यक हैं। वह नई दिल्ली स्थित नौसेना भवन में आयोजित नौसेना कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2025 को संबोधित कर रहे थे।

जनरल चौहान ने कहा कि भारतीय नौसेना ने राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने में असाधारण योगदान दिया है। उन्होंने तीनों सेनाओं को एक साझा दृष्टिकोण के साथ कार्य करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में एकीकृत योजना, संसाधनों का प्रभावी उपयोग और समन्वित कमांड संरचना ही आधुनिक युद्ध की सफलता की पूर्व शर्त है।

उन्होंने सैन्य संचालन में अंतर‑संचालन क्षमता (Interoperability) बढ़ाने, संयुक्त अभ्यासों को मजबूत करने और थिएटर कमांड ढांचे के क्रियान्वयन को तेज़ी से आगे बढ़ाने की बात कही।

रक्षा मंत्री और कैबिनेट सचिव का संदेश

सम्मेलन के दूसरे दिन कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन ने नौसेना कमांडरों को संबोधित करते हुए भारतीय नौसेना की भूमिका की सराहना की और कहा कि दक्षता, उत्तरदायित्व और एकीकरण—राष्ट्रीय क्षमताओं को सशक्त बनाने की कुंजी हैं। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने उद्बोधन में नौसेना की भूमिका को भारत की “इच्छाशक्ति और क्षमताओं का प्रतीक” बताया।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि नौसेना ने अपनी पेशेवर क्षमता और तत्परता से विश्व को भारत की समुद्री शक्ति का परिचय कराया है। उन्होंने बताया कि पिछले छह महीनों में नौसेना ने 335 व्यापारी जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया, जिनमें 1.2 मिलियन मीट्रिक टन माल और 5.6 अरब डॉलर का व्यापार शामिल है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सम्मेलन भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना में संयुक्त ऑपरेशनल दृष्टिकोण को और मजबूत करेगा तथा भविष्य के सैन्य सुधारों की दिशा तय करेगा।

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