World News: कनाडा में बसकर अपने परिवार और बुजुर्ग माता-पिता को अपने पास बुलाने का सपना देख रहे भारतीयों के लिए साल की शुरुआत एक बड़े झटके के साथ हुई है। अगर आप सोच रहे थे कि साल 2025 की पाबंदियों के बाद 2026 में राहत मिलेगी, तो संभल जाइए। कनाडा सरकार ने साफ कर दिया है कि पैरेंट्स एंड ग्रैंडपैरेंट्स प्रोग्राम (PGP) पर लगा ब्रेक फिलहाल हटने वाला नहीं है।
पुराने आवेदनों का बोझ और सरकार की सख्ती
कनाडा के इमिग्रेशन विभाग (IRCC) ने यह स्पष्ट कर दिया है कि साल 2026 में भी नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। दरअसल, कनाडाई सिस्टम इस समय पुराने आवेदनों के भारी बैकलॉग से दबा हुआ है। आंकड़ों की मानें तो 2023 के अंत तक ही लंबित आवेदनों की संख्या 40,000 के पार जा चुकी थी। ऐसे में सरकार का पूरा ध्यान अब पुराने मामलों को निपटाने पर है। 1 जनवरी 2025 से जो रोक शुरू हुई थी, उसे अब 2026 के लिए भी बढ़ा दिया गया है, जिससे हजारों भारतीय परिवारों की उम्मीदों पर तुषारपात हुआ है।
सिर्फ 10,000 खुशनसीबों को ही मिलेगी मंजूरी
आईआरसीसी ने स्पष्ट किया है कि भले ही हजारों लोग कतार में हों, लेकिन प्रोसेसिंग की रफ्तार बहुत धीमी रहेगी। विभाग के अनुसार, इस दौरान अधिकतम 10,000 पुराने आवेदनों पर ही अंतिम मुहर लगाई जाएगी। हाल ही में अक्टूबर 2025 तक चली प्रक्रिया में लगभग 17,860 लोगों को आवेदन के लिए बुलाया गया था, लेकिन इनमें से भी आधे से ज्यादा लोग खाली हाथ ही रहने वाले हैं।
सुपर वीजा: राहत या सिर्फ एक समझौता?
जब पीआर के रास्ते बंद हो रहे हैं, तो विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग ‘सुपर वीजा’ का रुख करें। हालांकि, यह पीआर (स्थायी निवास) का विकल्प नहीं है, लेकिन इसके जरिए माता-पिता एक बार में 5 साल तक कनाडा में रुक सकते हैं। इसमें सबसे बड़ी कमी यह है कि बुजुर्गों को सरकारी हेल्थकेयर का लाभ नहीं मिलता और न ही वे वहां काम कर सकते हैं। यह सिर्फ अपनों के साथ वक्त बिताने का एक अस्थायी रास्ता भर है।
इस खबर को भी पढ़ें : कनाडा में सिस्टम ने ली जान; 8 घंटे तड़पता रहा भारतीय, नहीं मिला इलाज
कनाडा में रह रहे पंजाब और हरियाणा के युवाओं के लिए यह खबर किसी त्रासदी से कम नहीं है, क्योंकि वहां की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देने वाला भारतीय समुदाय अब अपने परिवार को साथ रखने के लिए कानूनी दांव-पेंचों में उलझ कर रह गया है।



