Jharkhand News: DPS बोकारो की मेधावी छात्रा अक्षरा रॉय शर्मा ने अपने स्कूल, शहर और पूरे झारखंड का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर दिया है। फैशन और प्रबंधन जैसे दो अलग-अलग क्षेत्रों में देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त कर अक्षरा ने यह साबित कर दिया कि लगन, मेहनत और सही मार्गदर्शन से कुछ भी संभव है।
निफ्ट में देश की दूसरी टॉपर बनीं अक्षरा
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) की प्रवेश परीक्षा 2025 में अक्षरा ने ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल की है। एनटीए द्वारा आयोजित इस परीक्षा के तीन चरणों—जनरल एबिलिटी टेस्ट, क्रिएटिव एबिलिटी टेस्ट और इंटरव्यू—में बेहतरीन प्रदर्शन कर उन्होंने यह उपलब्धि पाई। यह परीक्षा भारत के सबसे प्रतिष्ठित फैशन तकनीकी संस्थान में प्रवेश के लिए होती है और इसमें लाखों छात्र हर वर्ष भाग लेते हैं।
IPMAT में भी टॉप रैंक, IIM इंदौर और रोहतक से मिला प्रवेश मौका
अक्षरा की सफलता यहीं तक सीमित नहीं रही। उन्होंने IIM इंदौर द्वारा आयोजित IPMAT परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 35 प्राप्त की है, जो प्रबंधन में एकीकृत पांच वर्षीय कार्यक्रम में प्रवेश के लिए मानी जाती है। इसके अलावा उन्होंने IIM रोहतक IPMAT और JIPMAT 2025 में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसमें उन्हें 98.8 पर्सेंटाइल प्राप्त हुए। यह परीक्षा IIM बोधगया और IIM जम्मू द्वारा आयोजित की जाती है।
विद्यालय परिवार में जश्न का माहौल, प्राचार्य ने कहा प्रेरणास्रोत
अक्षरा की उपलब्धियों से DPS बोकारो के प्रांगण में खुशी की लहर दौड़ गई। विद्यालय पहुंचने पर प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार और शिक्षकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्राचार्य ने कहा कि अक्षरा की सफलता उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो जीवन में कुछ अलग करना चाहते हैं।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और स्कूल की भूमिका
अक्षरा के पिता अमिताभ रॉय शर्मा और मां अर्चना रॉय शर्मा DPS बोकारो से ही जुड़े हैं, जहां अर्चना जी वरिष्ठ शिक्षिका हैं। अक्षरा ने नर्सरी से 12वीं तक की पढ़ाई DPS बोकारो से ही की है। 10वीं में उन्होंने 97% और 12वीं में 90% अंकों से सफलता पाई थी।
अक्षरा बताती हैं कि 12वीं के दौरान ही उन्होंने मेडिकल या इंजीनियरिंग के बजाय प्रबंधन और फैशन डिज़ाइन के क्षेत्र को चुना और उसी के अनुरूप तैयारी शुरू की। उन्होंने कहा कि DPS बोकारो ने उनके सपनों को उड़ान दी। स्कूल में मिले सर्वांगीण विकास के अवसरों ने उन्हें आत्मविश्वासी और लक्ष्य-संलग्न बनाया।
5 से 6 घंटे की पढ़ाई और रुचियों का संतुलन
एक खास बातचीत में अक्षरा ने बताया कि वह रोजाना 5-6 घंटे की गंभीर पढ़ाई करती थीं। साथ ही वह क्विज, डिबेट और चित्रकला में भी भाग लेती थीं। उन्हें किताबें पढ़ना और चित्र बनाना बहुत पसंद है। उन्हें जर्मन स्कॉलरशिप भी मिल चुकी है।
पिता हैं रोल मॉडल, जूनियर्स के लिए दिया संदेश
अक्षरा अपने पिता को अपना रोल मॉडल मानती हैं। उन्होंने जूनियर्स को संदेश दिया, “असफलता से डरें नहीं, बल्कि उसे सीख के रूप में लें। मेहनत और लगन से किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता। सफलता आपके कदम जरूर चूमेगी।”
यह केवल सफलता नहीं, एक मिसाल है
अक्षरा की यह सफलता केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं बल्कि आत्मविश्वास, साहस और धैर्य का प्रमाण है। उनके जैसी छात्राएं झारखंड जैसे राज्यों की प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर सामने लाती हैं और यह सिद्ध करती हैं कि सच्ची मेहनत की कोई सीमा नहीं होती।



