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Chanho (Ranchi): संघर्ष अगर इरादों से मजबूत हो, तो कोई भी शारीरिक कमजोरी इंसान के सपनों को रोक नहीं सकती। यह बात चान्हो प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की 12वीं कक्षा की छात्रा उर्मिला कुमारी ने अपने जीवन से साबित कर दिखाई है। दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद उर्मिला न सिर्फ पढ़ाई में अव्वल है, बल्कि कला और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सभी को प्रेरित कर रही है।
पढ़ाई के साथ कला में भी चमक
उर्मिला ड्राइंग और पेंटिंग के जरिए अपनी कल्पनाओं को रंगों में ढालती है। उसकी बनाई तस्वीरें देखकर शिक्षक और सहपाठी हैरान रह जाते हैं। इसके साथ ही वह गीतों की धुन पर भाव-भंगिमाओं के साथ बैठकर नृत्य भी करती है, जो देखने वालों के दिल को छू जाता है।
उसका आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच हर किसी को यह एहसास दिलाती है कि असली ताकत शरीर में नहीं, मन में होती है।
मंत्री ने किया सम्मानित
उर्मिला की मेहनत और लगन को देखते हुए झारखंड सरकार की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने एक कार्यक्रम के दौरान उसे प्रशस्ति पत्र और शॉल देकर सम्मानित किया। इस सम्मान से उर्मिला का हौसला और भी बढ़ गया है।
बैंक मैनेजर बनने का सपना
मैट्रिक परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण करने वाली उर्मिला का सपना है कि वह आगे चलकर बैंक मैनेजर बने। वह आत्मनिर्भर बनकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि समाज के लिए भी एक मिसाल बनना चाहती है। व्हीलचेयर के सहारे या हाथों के बल चलकर भी वह रोज स्कूल आती है और पूरे मन से पढ़ाई करती है। उसके चेहरे पर हमेशा आगे बढ़ने की ललक साफ झलकती है।
पूरे इलाके के लिए बनी प्रेरणा
उर्मिला की उपलब्धियां आज सिर्फ विद्यालय तक सीमित नहीं हैं। वह पूरे इलाके के बच्चों और अभिभावकों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उसकी कहानी यह सिखाती है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, अगर हौसले बुलंद हों तो मंज़िल जरूर मिलती है। उर्मिला ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इरादे और मेहनत के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।

